नयी दिल्ली, एक मई उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने उच्च शिक्षा को ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाने तथा इसे और अधिक ‘‘समावेशी तथा न्यायसंगत’’ बनाने का आह्वान किया है।
नायडू ने रविवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के शताब्दी समारोह के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा मानव विकास, राष्ट्र निर्माण और एक समृद्ध तथा टिकाऊ वैश्विक भविष्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को समाज की गंभीर समस्याओं का समाधान करने के लिए अभिनव और नए विचारों के साथ आना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ग्रामीण युवाओं को शिक्षा समावेशी और समान रूप से पहुंचे यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा मानव विकास, राष्ट्र निर्माण तथा एक समृद्ध एवं टिकाऊ वैश्विक भविष्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।’’
इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
नायडू ने कहा कि शोध का अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन को अधिक आरामदायक और खुशहाल बनाना होना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी होने का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए हमारे मानव संसाधनों की सामूहिक शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 को देश के शैक्षिक परिदृश्य में क्रांति लाने वाला एक ‘‘दूरदर्शी दस्तावेज़’’ करार देते हुए स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मातृ में शिक्षा दिए जाने की भी वकालत की और कहा कि यह कदम निर्णायक साबित हो सकता है।
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