देश की खबरें | ‘सिकल सेल एनीमिया’ के लिए एससी-एसटी समुदाय के लोगों की लक्षित जांच रोकने की जरूरत: सामाजिक कार्यकर्ता

नागपुर (महाराष्ट्र), पांच जुलाई सामाजिक कार्यकर्ता डॉ अभय बंग ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे एक पत्र में अनुरोध किया है कि ‘सिकल सेल एनीमिया’ का पता लगाने के लिए अनुसूचित जाति (एससी) एवं अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के सदस्यों की लक्षित जांच रोके जाने की जरूरत है क्योंकि यह उन्हें समाज में ‘‘कलंकित’’ करती है।

राष्ट्रपति मुर्मू बुधवार को महाराष्ट्र में गढ़चिरौली के दौरे पर हैं। वह वहां गोंडवाना विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं।

उनके दौरे के मद्देनजर, डॉ.बंग ने राज्य में आदिवासियों के समक्ष स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को रेखांकित करने के लिए उन्हें एक पत्र लिखा। डॉ बंग, पद्मश्री और महाराष्ट्र भूषण सम्मान प्राप्त है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक जुलाई को मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की शुरूआत की थी। मिशन का लक्ष्य सिकल सेल रोग से, विशेष रूप से जनजातीय आबादी के स्वास्थ्य को पेश आने वाली समस्याओं का समाधान करना है। इस मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट 2023 में की गई थी।

राष्ट्रपति मुर्मू को लिखे अपने पत्र में डॉ. बंग ने पंचायत (अनूसूचित क्षेत्र विस्तार) अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम लागू करने की भी मांग की।

उन्होंने पत्र में कहा, ‘‘गढ़चिरौली ने इन दोनों अधिनियमों को लागू करने में देश का नेतृत्व किया है। क्या राष्ट्रपति इन दोनों समाधान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करना सुनिश्चित करेंगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आदिवासियों के स्वास्थ्य पर भारत सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति मेरी अध्यक्षता में जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य पर अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट में इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि आदिवासी समुदाय के लोगों की स्वास्थ्य की स्थिति सबसे खराब है, लेकिन भारत में उन्हें सबसे खराब स्वास्थ्य देखभाल मिलती है।’’

डॉ.बंग ने ‘सिकल सेल एनीमिया’ के लिए एससी/एसटी समुदायों के सदस्यों की लक्षित जांच का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार और राज्य सरकारें ‘सिकल सेल एनीमिया’ नाम की एक आनुवंशिक रोग की जांच के लिए करीब 200 जिलों में लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रही है। यह जीन आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदाय की 10 से 20 प्रतिशत आबादी में पाया है। जिनमें एकल जीन पाया जाता है, उन्हें एक सिकल साथी से शादी नहीं करने का निर्देश देते हुए सिकल कार्ड दिया जाता है।’’

उन्होंने कहा कि एक प्राकृतिक तोहफे को इस कार्यक्रम के जरिये अभिशाप में तब्दील कर दिया गया है।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या माननीय राष्ट्रपति इस लक्षित जांच पर रोक लगाएंगी, जिसके भारत में आदिवासियों और अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ने की आशंका है।’’

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