तिरुवनंतपुरम, पांच जून केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता को नुकसान, पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि और दुनिया भर में कचरे के बढ़ते ढेर के मद्देनजर रविवार को कहा कि भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण का संरक्षण सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
विजयन ने ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ पर कहा कि इसे एक दिवसीय समारोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इस दिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य के लिए पर्यावरण का संरक्षण किया जाए।
मुख्यमंत्री ने स्थायी और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए कदमों के बारे में कहा कि कचरा संग्रहण, पृथक्करण और निपटारे की विभिन्न पद्धतियों को अपनाया जा रहा है। साथ ही, पिछले पांच वर्षों में करोड़ों पौधे लगाए गए हैं और राज्य भर में विभिन्न जागरूकता अभियान चलाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के इस निर्देश का स्वागत किया कि राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों सहित प्रत्येक संरक्षित वन में एक किलोमीटर का पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) होना चाहिए और देश भर में ऐसे उद्यानों के भीतर खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
विजयन ने कहा कि राज्य ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि वनों को संरक्षित रखने और अधिक से अधिक पेड़ लगाकर उनका दायरा बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि संरक्षित वनों के नजदीक रह रहे या निकट स्थान पर काम करने वाले लोग इस बात को लेकर आशंकित हो सकते हैं कि शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद उनका क्या होगा। उन्होंने उनकी आशंकाएं दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश को लागू करते समय उन क्षेत्रों में रहने या काम करने वाले लोगों के हितों को भी ध्यान में रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने राज्य में पिछले कुछ वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन आपदाओं का कारण दुनिया भर में हो रहा जलवायु परिवर्तन है।
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