नयी दिल्ली, 20 सितंबर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने बुधवार को ‘जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर सम्मेलन’ की शुरुआत के दौरान तत्काल जलवायु संबंधी कार्रवाई पर अमल करने का आह्वान किया और जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से जूझ रही है और संभवत: यह सबसे गर्म वर्ष के तौर पर दर्ज हुआ है।
दुनिया के कुछ सबसे बड़े प्रदूषणकारी देशों के नेता उस शिखर सम्मेलन से अनुपस्थित हैं, जिसे गुतारेस ने जलवायु संकट से निपटने के प्रयासों को फिर से मजबूत करने के लिए बुलाया है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुबह के सत्र के लिए पेश की गई 41 वक्ताओं की सूची में चीन, अमेरिका, ब्रिटेन और जापान के प्रतिनिधियों के नाम शामिल नहीं थे।
शिखर सम्मेलन को संबोधित करने वाले प्रमुख देशों में ऑस्ट्रिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, चिली, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।
अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और जीवाश्म ईंधन के सबसे अधिक उपयोगकर्ता देशों के ‘‘अथक लालच’’ के कारण बर्बाद हुए कीमती समय पर अफसोस जताया।
उन्होंने मांग की कि प्रमुख कार्बन उत्सर्जक, जिन्होंने जीवाश्म ईंधन से असमान रूप से लाभ उठाया है, उत्सर्जन में कटौती के लिए अतिरिक्त उपाय करें और अमीर देश जलवायु कार्रवाई में उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अपना पूर्ण समर्थन दें।
गुतारेस ने जीवाश्म ईंधन सब्सिडी को तत्काल बंद करने पर भी जोर दिया। उन्होंने ‘जलवायु न्याय’ की वकालत करते हुए दुनिया के सबसे गरीब देशों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की, जो एक ऐसे संकट का खामियाजा भुगत रहे हैं, जिसे पैदा करने में उन्होंने कोई भूमिका नहीं निभाई।
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