विदेश की खबरें | 'बिना लक्षणों वाले व्यक्तियों से संक्रमण के प्रसार की रोकथाम के लिए अधिक जांच करने की आवश्यकता'

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लंदन, आठ अक्टूबर लॉकडाउन के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए लगभग 86 प्रतिशत लोगों में इस महामारी के तय लक्षण जैसे बुखार, खांसी और सूंघने या स्वाद की क्षमता समाप्त होना आदि नहीं पाए गए।

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ब्रिटेन में हुए एक नए अध्ययन में बृहस्पतिवार को यह जानकारी सामने आई।

यूनिवर्सिटी कालेज ऑफ लंदन (यूसीएल) के विशेषज्ञों द्वारा लिखा गया शोध पत्र, ‘क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी’ नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

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अनुसंधान करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि 'साइलेंट' ट्रांसमिशन (संक्रमण) को रोकने के लिए बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाने की आवश्यकता है।

कोविड-19 के बिना लक्षणों वाले संक्रमितों के जरिये संक्रमण के प्रसार को साइलेंट ट्रांसमिशन कहा जा रहा है।

यूसीएल के महामारी विज्ञान तथा स्वास्थ्य विभाग की प्रोफेसर आइरीन पीटरसन ने कहा, “बहुत सारे लोगों की जांच के नतीजे में संक्रमण की पुष्टि हुई, लेकिन उनमें लक्षण नहीं थे। इस तथ्य के सामने आने के बाद भविष्य में जांच की रणनीति में परिवर्तन की आवश्यकता है। अधिक संख्या में जांच करने से ‘साइलेंट’ ट्रांसमिशन पर रोक और भविष्य में इस प्रकार की महामारी को फैलने से रोकने में सहायता मिलेगी।”

उन्होंने कहा, “भविष्य में केवल लक्षण वाले व्यक्तियों की ही नहीं बल्कि ज्यादा बड़े स्तर पर बार-बार जांच करने की आवश्यकता होगी, विशेषकर उन स्थानों पर जहां संक्रमण का खतरा ज्यादा है या अधिक लोग एक साथ काम करते हैं। उदाहरण के लिए मांस की फैक्टरी या विश्वविद्यालयों के सभागार। विश्वविद्यालयों के छात्रों की क्रिसमस की छुट्टी होने से पहले जांच करनी चाहिए।”

अनुसंधानकर्ताओं ने ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा कराए गए कोविड-19 संक्रमण सर्वेक्षण के आंकड़ों का इस्तेमाल किया।

कोविड-19 के लक्षणों वाले मरीजों और जांच के नतीजों के बीच संबंध जानने के उद्देश्य से एक बड़ी जनसंख्या पर यह सर्वेक्षण किया गया था।

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