नयी दिल्ली, 14 अगस्त नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि सुनहरी बाग रोड गोलचक्कर पर स्थित 150 साल पुरानी मस्जिद का संयुक्त निरीक्षण किया गया था और इस दौरान पाया गया कि यातायात के सुरक्षित एवं सुचारू प्रवाह के लिए मस्जिद को हटाने तथा जमीन को खाली कराने की जरूरत है।
एनडीएमसी ने कहा कि यह मामला दिल्ली सरकार के सचिव (गृह) की अध्यक्षता वाली धार्मिक समिति के समक्ष भी विचाराधीन है।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने एनडीएमसी से कहा कि वह दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से दायर याचिका पर अपने जवाबी हलफनामे में उक्त बात को रिकॉर्ड पर लाए। बोर्ड ने मस्जिद को तोड़े जाने के अंदेशे के तहत याचिका दायर की थी।
अदालत ने अधिकारियों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देने वाले अंतरिम आदेश की मियाद भी बढ़ा दी और उनसे धार्मिक समिति की रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद उसे अदालत के समक्ष रखने को कहा।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दी। बोर्ड ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया गया है वह मस्जिद को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाने का एनडीएमसी को निर्देश दे।
एनडीएमसी ने अपने जवाब में कहा कि उसने यातायात में बढ़ोतरी के मद्देनजर दिल्ली यातायात पुलिस के पत्र पर कार्रवाई करते हुए दो बार संयुक्त निरीक्षण किया। इसमें कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों ने सर्वसम्मति से निष्कर्ष निकाला कि धार्मिक ढांचे को हटाने/स्थानांतरित करने की जरूरत है।
इसमें कहा गया है कि भूमि का इस्तेमाल गोलचक्कर को फिर से डिजाइन करने और यातायात के सुरक्षित और सुचारू प्रवाह के लिए करने की जरूरत है।
जवाब में कहा गया है कि और कोई पर्याप्त व्यवहार्य विकल्प नहीं है और बड़े जनहित में धार्मिक ढांचे को हटाकर जमीन का इस्तेमाल करने का ही विकल्प है और बोर्ड की याचिका को खारिज किया जा सकता है।
याचिकाकर्ता दिल्ली वक्फ बोर्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील वजीह शफीक ने पहले कहा था कि मस्जिद का अस्तित्व क्षेत्र में यातायात जाम का कारण नहीं है और बोर्ड को 24 घंटे से कम वक्त पहले निरीक्षण की सूचना मिली थी।
बोर्ड की याचिका में यह भी दावा किया गया है कि हाल में कई वक्फ संपत्तियों को "मनमानी का खुले तौर पर प्रदर्शन करते” हुए और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना रातों-रात ध्वस्त कर दिया गया है।
याचिका में दावा किया गया है कि तीन जुलाई को याचिकाकर्ता की तकनीकी टीम द्वारा खींची गई तस्वीरें साफ तौर पर दिखाती हैं कि यातायात जाम का कारण गोलचक्कर पर बनी मस्जिद नहीं है, बल्कि मोतीलाल नेहरू मार्ग के दोनों कैरिजवे पर गाड़ियों को अनियंत्रित तरीके से खड़ा करना है।
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