जरुरी जानकारी | एनसीएलटी ने रिलायंस कैपिटल के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया के लिए रिजर्व बैंक की याचिका स्वीकार की
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मुंबई, छह दिसंबर राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने रिलायंस कैपिटल के खिलाफ दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की भारतीय रिजर्व बैंक की याचिका को स्वीकार कर लिया है।
पिछले सप्ताह रिजर्व बैंक ने कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) शुरू करने के लिए आवेदन किया था। शीर्ष बैंक ने चूक और संचालन के मुद्दों का हवाला देते हुए रिलायंस कैपिटल के निदेशक मंडल को भंग कर दिया था।
इससे पहले सोमवार को प्रदीप नरहरि देशमुख और कपल कुमार वोहरा की एनसीएलटी की मुंबई पीठ ने अपने फैसले को सुरक्षित रखा था। बाद में पीठ ने रिजर्व बैंक के आवेदन को स्वीकार कर लिया।
कंपनी के प्रवर्तकों ने एक बयान में कहा कि वे तेजी से समाधान के लिए धारा 227 के तहत कंपनी को एनसीएलटी में भेजने के रिजर्व बैंक के आवेदन के पक्ष में हैं।
दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 227 के तहत सरकार वित्तीय क्षेत्र के नियामकों, वित्तीय सेवाप्रदाताओं के साथ विचार-विमर्श में दिवाला एवं परिसमापन की प्रक्रिया को अधिसूचित कर सकती है।
रिलायंस कैपिटल पर ऋणदाताओं का 19,805 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। इसमें से अधिकांश राशि ट्रस्टी विस्तारा आईटीसीएल इंडिया के तहत बांड के माध्यम से है।
कोलकाता के श्रेई ग्रुप तथा दीवान हाउसिंग फाइनेंस (डीएचएफएल) के बाद रिलायंस कैपिटल समाधान प्रक्रिया में जाने वाली तीसरी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) है।
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