जरुरी जानकारी | एनसीएलएटी ने एचडीआईएल के खिलाफ दिवाला कार्रवाई शुरू करने के एनसीएलटी के आदेश को सही ठहराया

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नयी दिल्ली, 14 जुलाई राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने एचडीआईएल के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश को सही ठहराया। इस संबंध में उसने कंपनी के प्रवर्तक राकेश वधावन की याचिका को खारिज कर दिया।

अपीलीय न्यायाधिकरण की तीन सदस्यीय पीठ का मानना है कि एनसीएलटी ने हाउसिंग डेवलपमेंट एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एचडीआईएल) को उसके कर्जदाताओं के साथ मामले को निपटाने के लिये पर्याप्त मौके उपलब्ध कराये हैं। लेकिन कंपनी भुगतान करने अथवा किसी समझौते पर पहुंचने में नाकाम रही।

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इससे पहले एनसीएलटी की मुंबई शाखा ने 20 अगस्त 2019 को अपने आदेश में एचडीआईएल के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आफ इंडिया ने कंपनी के खिलाफ 522 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में डिफाल्ट होने पर दिवाला कार्रवाई शुरू करने की याचिका दायर की थी।

एनसीएलएटी पीठ के प्रमुख कार्यवाहन चेयरपर्सन न्यायमूर्ति बी एल भट ने कहा, ‘‘पहले जो कुछ रिकार्ड में है उसको देखते हुये हमारा मानना है कि 20 अगस्त 2019 के आदेश के खिलाफ किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसलिये अपील असफल होती है।’’

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एनसीएलएटी ने वधावन के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि एनसीएलटी ने कंपनी को जवाब दाखिल करने का अवसर दिये बिना ही आदेश पारित कर दिया। वधावन ने इसे स्वाभाविक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ बताया था।

एनसीएलएटी ने इस तर्क को गलत बताते हुये कहा कि एचडीआईएल को जवाब देने के लिये पर्याप्त अवसर दिये लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि रिकार्ड देखने से पता चलता है कि आपसी सहमति की उम्मीद में कंपनी को एक फरवरी 2019 से लेकर 28 मार्च 2019 तक बार बार समय दिया गया। इस सब के बावजूद एचउीआईएल भुगतान करने में असफल रही।

इससे पहले 10 जुलाई को मुंबई स्थित अदालत ने रोकेश वाधवान और सारंग वाधवान को जमानत देने से इन्कार कर दिया। ये दोनों करोड़ो रुपये के पंजाब एण्ड महाराष्ट्र को-आपरेटिव (पीएमसी) बैंक घोटोले में भी आरोपी हैं। यह मामला पिछले साल सितंबर में सामने आया। राकेश वधावान और उनके पुत्र सारंग वधावन कई अन्य मामलों के साथ ही 4,355 करोड़ रुपये के पीएमसी बैंक घोटोले में भी आरोपी हैं। मामले की मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय भी जांच कर रहा है।

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