देश की खबरें | मेरी तो दुनिया ही खत्म हो गयी: राजौरी हमले में दो बेटों को गंवाने वाली मां ने कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जम्मू कश्मीर में बीमारी के कारण पति को गंवाने के चार साल बाद प्रदेश के राजौरी जिले की रहने वाली सरोज बाला को उस वक्त जबरदस्त झटका लगा उनके गांव में ही आतंकवादियों के हमले में उनके दो बेटे मारे गये । इससे वह संभवत: कभी नहीं उबर पायेंगी क्योंकि उनका हर सपना चकनाचूर हो गया और सारी उम्मीदें धरी रह गयीं।
राजौरी (जम्मू कश्मीर), नौ जनवरी जम्मू कश्मीर में बीमारी के कारण पति को गंवाने के चार साल बाद प्रदेश के राजौरी जिले की रहने वाली सरोज बाला को उस वक्त जबरदस्त झटका लगा उनके गांव में ही आतंकवादियों के हमले में उनके दो बेटे मारे गये । इससे वह संभवत: कभी नहीं उबर पायेंगी क्योंकि उनका हर सपना चकनाचूर हो गया और सारी उम्मीदें धरी रह गयीं।
राजौरी जिले में स्थित सरोज बाला के गांव में आतंकवादियों ने हमला कर सात लोगों की हत्या कर दी जिसमें उनके दो बेटे भी शामिल थे।
रविवार को सरोज का 21 साल का बेटा प्रिंस शर्मा भी जिंदगी की जंग हार गया और जम्मू के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में उपवचार के दौरान उसकी मौत हो गयी। धांगरी गांव में एक जनवरी को आतंकवादी हमले में गोली लगने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सरोज का बड़ा बेटा 27 वर्षीय दीपक उसी दिन इस हमले में मारा गया था।
जब वह अपने पहले बेटे की मौत पर शोक मना रही थी तभी दूसरे बेटे के भी चले जाने के दुख ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। रविवार को उनके छोटे बेटे का दाह संस्कार किया गया।
शोकाकुल सरोज ने कहा, ‘‘मैं अकेली रह गयी हूं। अब कौन मुझसे बात करेगा? मेरी दुनिया खत्म हो गयी है। जिंदगी में मैं सबकुछ गंवा बैठी।’’
छोटे बेटे की मौत के बाद बड़ी संख्या में लोग उन्हें सांत्वना देने पहुंचे।
आतंकवादियों ने एक जनवरी की शाम को धांगरी गांव पर हमला कर तीन घरों को निशाना बनाया था और मौके से फरार हो गये थे । आतंकियों ने शर्मा के घर के बाहर एक परिष्कृत विस्फोटक उपकरण (आईईडी) छोड़ दिया था जो अगली सुबह फटा था।
दीपक और तीन अन्य की पहले दिन मौत हो गयी थी, जबकि उसी परिवार के दो अन्य- विहान कुमार शर्मा (चार) और समीक्षा शर्मा (16) - की अगले दिन आईईडी विस्फोट में मौत हो गयी थी । प्रिंस समेत 15 लोग घायल हुए थे।
अपने पति की मौत के दुख से अभी-अभी उबरीं बाला ने कहा कि अब आगे के लिए कुछ बचा ही नहीं है। उनका कहना है कि अपने बेटों को शादी होने और उनके घर बसने का उनका सपना चकनाचूर हो गया।
तकदीर ने ऐसा क्रूर मोड़ लिया कि भारतीय वायुसेना के आयुध विभाग में नौकरी के लिए चुन लिये गये दीपक का मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया और उसी दिन उसे लेह में अपने काम पर रिपोर्ट करना था।
प्रिंस शर्मा जलशक्ति विभाग में नौकरी कर रहा था। उसे यह नौकरी अपने पिता राजिंदर कुमार शर्मा के निधन के बाद मिली थी। राजिंदर कुमार शर्मा विभाग के कर्मचारी थे और चार साल पहले उनकी मृत्यु हो गयी थी।
निराशा के दलदल में फंसी बाला ने कहा, ‘‘रोज मेरे दोनों बेटे मेरे साथ बैठते थे। हम परिवार के मुद्दों पर लंबे समय तक बातें करते थे। अब मेरी जिंदगी का कोई मोल नहीं है। मेरे बच्चों की मौत के साथ सबकुछ चला गया।’’
अपने बेटों के चले जाने के दुख से जूझ रही सरोज (58) ने पति के इलाज के दौरान आयी कठिनाईयों को याद करते हुये कहा कि उनकी (पति की) बीमारी ने उनके बेटों पर बहुत दबाव डाला जिन्होंने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की।
उन्होंने कहा, ‘‘हम आने वाले समय में अच्छे दिनों की आस कर रहे थे लेकिन आतंकवादियों ने हमारी सारी खुशियां छीन लीं।’’
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