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जरुरी जानकारी | मांग निकलने से सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. मिल वालों की मांग निकलने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को सरसों तेल-तिलहन तथा शादी-विवाह के मौसम की कुछ मांग निकलने से सोयाबीन तेल कीमतों में सुधार दर्ज हुआ वहीं दाम में गिरावट के बावजूद मांग कमजोर बने रहने से कच्चे पाम तेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल में गिरावट देखने को मिली। मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन और बिनौला तेल के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए।

जरुरी जानकारी | मांग निकलने से सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल में सुधार

नयी दिल्ली, 21 अप्रैल मिल वालों की मांग निकलने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को सरसों तेल-तिलहन तथा शादी-विवाह के मौसम की कुछ मांग निकलने से सोयाबीन तेल कीमतों में सुधार दर्ज हुआ वहीं दाम में गिरावट के बावजूद मांग कमजोर बने रहने से कच्चे पाम तेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल में गिरावट देखने को मिली। मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन और बिनौला तेल के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए।

शिकॉगो एक्सचेंज में घट-बढ़ जारी है जबकि मलेशिया एक्सचेंज में भारी गिरावट है। मलेशिया का निर्यात लगभग 10 साल के निचले स्तर पर आ गया है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि तेल मिलों की मांग निकलने के बीच सरसों तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया। लेकिन इस सुधार के बावजूद सरसों का मौजूदा दाम अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 3-4 प्रतिशत कम ही है। इसी प्रकार शादी-विवाह के मौसम की छिटपुट मांग के कारण सोयाबीन तेल के दाम में भी मामूली सुधार देखने को मिला। वहीं दूसरी ओर, किसानों द्वारा नीचे दाम पर बिकवाली का स्तर कम रखने के बीच सोयाबीन तिलहन कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं।

सूत्रों ने कहा कि सरकार की ओर से मूंगफली की बिकवाली को इसकी बिजाई तक के लिए टालने के बारे में विचार करना चाहिये। कमजोर दाम पर इसकी बिकवाली जारी रही तो इस नायाब फसल की बिजाई प्रभावित होने का खतरा है। सरकारी कम दाम पर बिकवाली जारी रहने से मूंगफली किसानों में अच्छा संकेत नहीं जायेगा और वे सूरजमुखी की तरह कहीं मूंगफली की खेती में रुचि लेना न छोड़ दें। मूंगफली के रबी और खरीफ, दोनों ही फसलों का उत्पादन घटने का स्पष्ट लक्षण दिख रहा है।

उन्होंने कहा कि सीपीओ और पामोलीन का दाम कम हुआ है लेकिन सोयाबीन तेल से इसका थोक दाम अभी 1-2 रुपये किलो ही कम है। सोयाबीन के मुकाबले सीपीओ का दाम जब तक 4-5 रुपये किलो कम नहीं होगा, इस तेल के खपने के आसार कम ही हैं। प्रति टन के हिसाब से सोयाबीन तेल के दाम से सीपीओ का थोक दाम 25 डॉलर प्रति टन कम है और खपने के लिए इस अंतर को और बढ़ना होगा यानी सोयाबीन तेल के थोक दाम से पर्याप्त कम होना होगा। मलेशिया में अक्टूबर-नवंबर तक पाम-पामोलीन के उत्पादन बढ़ने का समय है। अभी भी दाम महंगा रहने के कारण मलेशिया से निर्यात भी घटा है। जब तक बाजार की धारणा के अनुरूप पाम-पामोलीन के दाम कम नहीं होंगे, इसके खपने या मांग निकलने की संभावना कम है।

बिनौले की बेहद कम उपलब्धता रहने और पामोलीन का दाम बिनौला से नीचे जाने के बीच बिनौला तेल के भाव भी पूर्ववत बने रहे।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 6,250-6,350 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 5,725-6,100 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,150 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,245-2,545 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 12,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,345-2,445 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,345-2,470 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 12,100 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,350 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,550-4,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,250-4,300 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 21, 2025 08:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).