देश की खबरें | हत्या का मामला: अदालत ने जेजेबी का आदेश पलटा, दो किशोरों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाया जाएगा

नयी दिल्ली, दो सितंबर दिल्ली की एक अदालत ने हत्या के एक मामले में लगभग 17 वर्ष की उम्र के दो किशोरों पर वयस्कों के रूप में मुकदमा चलाने का असामान्य आदेश सुनाया है, क्योंकि दोनों किशोरों ने हत्या के एक अन्य मामले में जल्दी छूट जाने के बावजूद नृशंस अपराध करने का "दुस्साहस" किया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सावित्री अत्री ने अपराध की "क्रूरता" के अलावा आरोपियों की शारीरिक और मानसिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के उस आदेश को रद्द कर दिया। जेजेबी ने पिछले साल सितंबर में अपने आदेश में कहा था कि दोनों के खिलाफ किशोर आरोपी के रूप में मुकदमा चलाया जाए न कि वयस्कों के रूप में।

अदालत ने कहा कि दोनों जेजेबी की कार्यवाही से अच्छी तरह वाकिफ थे और उन्होंने पीड़िता की हत्या की साजिश को ‘‘पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से’’ अंजाम दिया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 17 साल और दो महीने की उम्र के दोनों किशोरों ने नौ मई, 2022 को आत्मा राम नामक एक व्यक्ति के बेटे की हत्या कर दी थी।

अदालत ने अपने हालिया आदेश में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसके अनुसार मृतक को चार फ्रैक्चर और 33 चोटें लगी थीं, जिनमें 20 विदीर्ण घाव भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि ये घाव और चोटें ‘‘नृशंसता दिखाने के लिए पर्याप्त थीं।’’

इसमें कहा गया है कि एक किशोर ने पहले पीड़ित के सिर पर सॉस की बोतल से वार किया, फिर उसकी छाती पर एक बड़े पत्थर से वार किया तथा अंत में देसी पिस्तौल की बट से उसे घायल कर दिया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि दूसरे किशोर ने भी हत्या को अंजाम देने में "सक्रिय रूप से भाग लिया"।

सत्र अदालत ने जेजेबी के आदेश के खिलाफ मृतक के पिता की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों किशोरों में न केवल हत्या करने की शारीरिक और मानसिक क्षमता थी, बल्कि वे अपने कृत्य के परिणामों को भी समझते थे।

इसमें कहा गया कि जिस तरह से उन्होंने अपराध किया है उससे इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

आत्माराम ने अपनी अपील में कहा कि दोनों किशोर पहले एक अन्य हत्या के मामले में शामिल थे और वर्तमान अपराध उचित रणनीति के साथ पूर्व नियोजित तरीके से किया गया था।

अदालत ने कहा, “जिस तरीके से कथित घटना को अंजाम दिया गया, वह यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि किशोर आरोपियों के पास अपराध करने की शारीरिक और मानसिक क्षमता मौजूद थी। उन्होंने मृतक की हत्या की अपनी साजिश को पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया था।’’

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा, ''बच्चे की तुलना में उस पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाया जा रहा है।’’

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