मुम्बई, 30 अप्रैल बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मुम्बई पुलिस को उस बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें पुलिस द्वारा अवैध रूप से पृथक-वास में डाल दिये गये श्रमिक संघ के एक कायकर्ता को अदालत में पेश करने और फिर उसे रिहा करने की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति सी वी भदांग ने पुलिस को पांच मई तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने याचिका दायर करके अदालत से मजदूर संघ कार्यकर्ता के नारायणन को रिहा करने का अनुरोध किया है।
याचिकाकर्ता की वकील गायत्री सिंह के अनुसार नारायणन को 21 अप्रैल को तब पुलिस ले गयी जब वह उपनगरीय अंधेरी क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों के बीच भोजन एवं अन्य जरूरी चीजें वितरित कर रहे थे।
याचिका के अनुसार, नारायणन और उनके कुछ साथियों ने कोविड-19 लॉकडाउन से प्रभावित प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा को सामने लाने के लिए सीटू के राष्ट्रीय प्रदर्शन के तहत तख्तियां और झंडे ले रखे थे।
सिंह के मुताबिक नारायणन के दो साथियों को छोड़ दिया गया जबकि उन्हें जोगेश्वरी की एक निजी प्रयोगशाला में ले जाया गया और कोविड-19 को लेकर उनका परीक्षण किया गया। उन्हें बताया गया कि तय प्रक्रिया के तहत उनके परीक्षण का परिणाम 48 घंटे में उनके मोबाइल पर भेजा जाएगा।
सिंह के अनुसार, नारायणन को घर जाने देने के बजाय पुलिस ने उनका फोन ले लिया और वह उन्हें पृथक-वास केंद्र ले गयी जबकि उनकी किसी भी कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या किसी निरुद्ध क्षेत्र में जाने की पृष्ठभूमि नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह (पृथक-वास) हिरासत में रखने जैसा है।
अदालत ने पुलिस को नारायणन को फोन लौटाने और उन्हें साफ-सुथरे कपड़े देने का निर्देश दिया।
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