नयी दिल्ली, 18 मई सस्ते तेलों का आयात बढ़ने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल जैसे सभी खाद्य तेलों में गिरावट आई। जबकि किसानों द्वारा नीचे भाव में बिकवाली नहीं करने से सरसों तेल-तिलहन के भाव में मामूली सुधार हुआ।
बाजार सूत्रों ने बताया कि मलेशिया एक्सचेंज में मामूली गिरावट रही जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में कल रात 1.85 प्रतिशत की गिरावट के बाद फिलहाल सुधार है। देशी तेल-तिलहनों पर सस्ते विदेशी खाद्य तेलों का असर बना हुआ है और सरकार को इस ओर ध्यान देना होगा कि स्थिति को कैसे संभाला जाये।
सूत्रों ने कहा आज से 5-6 महीने पहले कांडला बंदरगाह पर कच्चा जमा हुआ पीले रंग का पामतेल (सीपीओ), सरसों तेल और बिनौला तेल (सॉफ्ट ऑयल) से 40 रुपये सस्ता हुआ करता था। बिनौला तेल भी बढिया खाद्य तेलों में गिना जाता है। लेकिन महाराष्ट्र के अकोला वालों ने पंजाब के प्रसंस्करणकर्ताओं को बिनौला तेल आज सीपीओ से 4-5 रुपये किलो नीचे बेचा है। यह तेल पेराई मिलों की ताजा दुर्दशा को दर्शाता है।
सूत्रों ने कहा कि देश के तेल संगठनों की चिंता कभी वायदा कारोबार खोलने को लेकर होती है तो कभी पाम और पामोलीन के बीच शुल्क अंतर को बढ़ाने की होती है। लेकिन तेल मिलों और किसानों की इस दुर्दशा के बारे में कोई जुबान क्यों नहीं खोलते? संभवत: पहली बार बिनौला तेल का भाव पामोलीन से नीचे हुआ है लेकिन देश के तेल मिलों की इस दुर्दशा के बारे में कौन बोलेगा, यह गंभीर प्रश्न है।
सूत्रों ने कहा कि दिल्ली के श्रद्वानंद मार्केट में प्रति 15 किलो का टिन वाला सूरजमुखी तेल (1,625 रुपये टिन), सोयाबीन (1,610 रुपये टिन) और पामोलीन (1,590 रुपये का टिन) का लगभग एक समान भाव है। टिन वाला माल खरीदने वाले उपभोक्ताओं में यह माल तुरंत खप जाता है। लेकिन इन सभी खाद्य तेलों का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 2,250 रुपये प्रति टिन है। इसे लगभग चार महीने पुराना एमआरपी वाला तेल बताकर बेचा जा रहा है जबकि ये खाद्य तेल तुरंत के तुरंत खपत हो जाते हैं।
सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेलों के भाव बढ़ने पर तो तेल मिलों पर ‘स्टॉक लिमिट’ (स्टॉक रखने की सीमा) के साथ कभी कभी छापेमारी भी की जाती है लेकिन जिनको खाद्य तेलों के शुल्कमुक्त आयात की सुविधा दी जाती है और वे जब मनमाने एमआरपी पर उस खाद्य तेल को 50-50 रुपये लीटर ऊंचा बेचते हैं तो उस पर कोई नियम लागू नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार को इन पैकरों के लिए एक सरकारी पोर्टल बनावाना चाहिये और उनसे अपने एमआरपी के बारे में नियमित तौर पर खुलासा करने का निर्देश देने के बाद पूरी व्यवस्था की कड़ी निगरानी रखनी चाहिये।
बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 4,900-5,000 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,600-6,660 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,425 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,455-2,720 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 9,350 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,595-1,675 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,595-1,705 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,880 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,500 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,640 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,900 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,200-5,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,950-5,030 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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