विदेश की खबरें | मोरक्को : भूकंप में 600 से ज्यादा लोगों की मौत, 329 अन्य घायल, ऐतिहासिक इमारतें क्षतिग्रस्त

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ऐतिहासिक मराकेश शहर से लेकर एटलस पर्वत पर स्थित गांवों तक कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

ऐतिहासिक मराकेश शहर से लेकर एटलस पर्वत पर स्थित गांवों तक कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई देशों के नेताओं ने मोरक्को को मदद की पेशकश की है।

मोरक्को के गृह मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि भूकंप के कारण कम से कम 632 लोगों की मौत हुई है। अधिकतर लोगों की मौत मराकेश और भूकंप के केंद्र के निकट स्थित पांच प्रांतों में हुई है। मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा 329 लोग घायल हैं।

उसने बताया कि तलाश अभियान जारी है और बचावकर्मी दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में मृतक संख्या और बढ़ने की आशंका है।

मोरक्को के टेलीविजन चैनलों ने भूकंप बाद की स्थिति के दृश्य प्रसारित किए। भूकंप बाद के झटकों के डर से लोग घरों से बाहर सड़कों पर आ गए। घबराये हुए लोग सड़कों या फुटपाथ पर खड़े नजर आए। कुछ लोग बच्चों, कंबल या अन्य सामान लेकर खड़े थे। आपातकर्मी इमारतों के मलबे में जीवित लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।

मोरक्को की मीडिया ने बताया कि मराकेश शहर के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से शामिल 12वीं सदी की कुतुबिया मस्जिद को नुकसान पहुंचा है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है कि क्षति कितनी हुई है। इसकी 69-मीटर (226-फुट) मीनार को ‘माराकेश की छत’ के रूप में जाना जाता है।

मोरक्को वासियों ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा किए हैं, जिनमें इमारतें ढहकर मलबे में तब्दील हुई दिख रही हैं और चारों तरफ धूल नजर आ रही है। मोरक्को के ऐतिहासिक शहर मराकेश के चारों ओर बनी प्रसिद्ध लाल दीवारों के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मराकेश यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) के विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है।

भूकंप के केंद्र के पास स्थित एक शहर के प्रमुख ने मोरक्को की समाचार साइट ‘2एम’ को बताया कि निकटवर्ती शहरों के कई मकान आंशिक रूप से या पूरी तरह ढह गए हैं, कुछ स्थानों पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है और सड़क मार्ग अवरूद्ध हो गए हैं।

तलत एन याकूब शहर के प्रमुख अब्दर्रहीम ऐत दाउद ने बताया कि प्राधिकारी प्रांत में सड़कों को साफ कर रहे हैं, ताकि एम्बुलेंस वहां से गुजर सकें और प्रभावित आबादी को सहायता मुहैया कराई जा सके। उन्होंने कहा कि पर्वत पर स्थित गांवों के बीच अत्यधिक दूरी होने के कारण नुकसान का आकलन करने में समय लगेगा।

स्थानीय मीडिया ने बताया कि भूकंप के केंद्र के आसपास के पर्वतीय क्षेत्र की ओर जाने वाले सड़क मार्ग बाधित हो जाने के कारण बचाव अभियान धीमा है।

जी20 समूह के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कहा, ‘‘मोरक्को में भूकंप के कारण लोगों की मौत से अत्यधिक दुखी हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं मोरक्को के लोगों के साथ हैं। अपने प्रियजन को खोने वाले लोगों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। भारत इस मुश्किल वक्त में मोरक्को को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है।’’

जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज ने भी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के जरिए मोरक्को के प्रति संवेदना व्यक्त की।

संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र भूकंप प्रभावित आबादी की सहायता के प्रयासों में मोरक्को सरकार की सहायता करने के लिए तैयार है।’’

अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि रात 11 बजकर 11 मिनट पर आए भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 6.8 थी और भूकंप बाद के झटके कई सेकंड तक महसूस किये गए। अमेरिकी एजेंसी ने 19 मिनट बाद भी 4.9 तीव्रता का झटका महसूस किये जाने की सूचना दी।

शुक्रवार को आए इस भूकंप का केंद्र मराकेश से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण में अल हौज प्रांत के इघिल शहर में था।

यूएसजीएस ने बताया कि भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से 18 किलोमीटर की गहराई में था, जबकि मोरक्को की भूकंप निगरानी एजेंसी के मुताबिक, इसका केंद्र आठ किलोमीटर गहराई में था।

उत्तरी अफ्रीका में भूकंप अपेक्षाकृत कम आते हैं।

‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जियोफिजिक्स’ में भूकंपीय निगरानी और चेतावनी विभाग के प्रमुख लाहकन म्हन्नी ने ‘2एम’ टीवी से कहा कि यह क्षेत्र में आया अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप है।

मोरक्को के अगादिर शहर के पास 1960 में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसके कारण हजारों लोगों की मौत हो गई थी। इस भूकंप के बाद मोरक्को में निर्माण संबंधी नियमों में बदलाव किया गया था, लेकिन कई इमारतें, खासकर गांवों में घर भूकंप रोधी नहीं हैं।

भूमध्यसागर के तटीय शहर अल होसेइमा के पास 2004 में आए 6.4 तीव्रता के भूकंप में 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

‘पुर्तगीज इंस्टीट्यूट फॉर सी एंड एटमॉस्फियर’ और अल्जीरिया की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, भूकंप के झटके पुर्तगाल और अल्जीरिया तक महसूस किए गए।

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