नयी दिल्ली, आठ सितंबर मूलचंद अस्पताल ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि उसके यहां 2017 से भर्ती अमेरिका के न्यूयॉर्क की अल्जाइमर रोगी 84 वर्षीय एक स्त्री रोग चिकित्सक की स्थिति बिगड़ गयी है। अस्पताल ने अदालत से इस मरीज के करीब 52 लाख रुपये के चिकित्सा बिल के भुगतान में मदद मांगी है।
डॉ. सुंदरी जी भागवनानी को 2017 में उनके भाई अस्पताल लेकर आए थे जिनका अपनी एक याचिका के लंबित रहने के दौरान निधन हो गया था।
भागवनानी के भाई ने अदालत से अपनी बहन के स्वास्थ्य की देखभाल करने एवं मेडिकल बिल का भुगतान करने के लिए उन्हें अभिभावक नियुक्त किए जाने का अनुरोध किया था।
न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने अस्पताल की अर्जी पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई नवंबर के लिए निर्धारित कर दी।
अस्पताल ने अदालत से अपनी अर्जी में आग्रह किया है कि महिला चिकित्सक के 51,97,329 रुपये के चिकित्सा बिल का भुगतान कराने में मदद की जाए।
चूंकि भागवनानी अपनी यादाश्त खो बैठी हैं और उनकी देखभाल के लिए कोई रिश्तेदार आगे नहीं आया है, ऐसे में उच्च न्यायालय ने इस मामले में पिछले साल एक अदालत मित्र नियुक्त किया था। अदालत ने मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) से रोगी की स्थिति का परीक्षण करने और उपाय सुझाव को भी कहा।
भागवनानी का अल्जाइमर रोग एक ऐसे चरण में पहुंच गया है जहां वह अपनी देखभाल करने में असमर्थ हैं और उनके लिए चिकित्सकीय निरीक्षण की जरूरत है।
इस साल मई में उच्च न्यायालय ने दक्षिण पूर्वी दिल्ली के जिलाधिकारी को मरीज के लिए सीमित अधिकार वाला अभिभावक नियुक्त किया था तथा इहबास को मरीज की देखभाल करने और अभिभावक के साथ मिलकर फैसला करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का आदेश भी दिया था।
उच्च न्यायालय ने कहा था, ‘‘जहां तक लंबित बिल की बात है तो जिलाधिकारी को यह फैसला करने का निर्देश दिया जाता है कि अस्पताल का कितना बिल बकाया है और उन्हें प्रतिवादी नंबर दो मूलचंद अस्पताल के पक्ष में उस देय राशि को जारी करने के बारे में निर्देश देने की आजादी होगी।’’
अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट को मरीज के बैंक खाते का संचालन करने और इलाज के सिलसिले में अस्पताल को जरूरी धनराशि जारी करने को कहा था।
अस्पताल ने अपने आवेदन में कहा कि मरीज की स्थिति और बिगड़ गयी है तथा उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती किया जाना है। इसने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट को 28 अगस्त को इसके बारे में बताया गया था।
इसने कहा कि मरीज को जीवनरक्षक प्रणाली पर रखे जाने की स्थिति में जिलाधिकारी को सहमति देने तथा अस्पताल के बिल का भुगतान किए जाने को कहा गया था।
अस्पताल ने केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) का लाभ देने के सरकार के फैसले को भी चुनौती दी है और कहा है कि यह कदम मनमानी वाला है क्योंकि मरीज अमेरिकी नागरिक होने के नाते इस सुविधा की हकदार नहीं है।
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