टम्पा (अमेरिका), चार जून (द कन्वरसेशन) यूरोप महाद्वीप के सबसे गरीब देश मोल्दोवा के पूर्व में यूक्रेन और पश्चिम में यूरोपीय संघ (ईयू) के देश स्थित हैं। ऐसे में यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के लिहाज से इसकी स्थिति वास्तव में संवेदनशील है।
लेकिन पूर्व सोवियत गणराज्य का हिस्सा रहा मोल्दोवा लगातार यह संकेत दे रहा है कि वह ईयू से जुड़ना चाहता है।
मोल्दोवा की राजधानी चिशिनाउ के दक्षिणपूर्व में स्थित मिमी कैसल में एक जून, 2023 को यूरोपीय नेताओं की राजनीतिक बैठक हुई, जिसमें यूरोप की सुरक्षा और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए चर्चा हुई। रूस के खिलाफ युद्ध में पश्चिमी देशों से मदद की गुहार लगा रहे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की भी बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में शामिल रहे।
मोल्दोवा की पश्चिम के प्रति झुकाव रखने वाली सरकार ने आरोप लगाया है कि रूस ने ईयू में मोल्दोवा का प्रवेश रोकने का प्रयास किया है, लेकिन ईयू के एक शीर्ष नेता ने हाल में कहा था कि संगठन “खुली बांहों और खुले दिल” से मोल्दोवा का स्वागत करता है।
मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सैंडू ने 22 मई को चिशिनाउ में आयोजित ईयू समर्थक राजनीतिक रैली के दौरान कहा था, “मोल्दोवा नहीं चाहता कि क्रेमलिन (रूस) उसे ब्लैकमेल करे। अब हम यूरोप से दूर नहीं रहना चाहते।”
उन्होंने कहा था कि मोल्दोवा 2030 तक ईयू में शामिल होना चाहता है।
हालांकि मोल्दोवा के लिए एक प्रमुख जटिल कारक यह है कि रूसी सैनिकों ने 1992 से इसके पूर्वी हिस्से में स्थित क्षेत्र ट्रांसनिस्ट्रिया पर कब्जा कर रखा है।
पूर्वी यूरोप से संबंधित शोधकर्ता होने के नाते मुझे लगता है कि उन कारणों को समझना चाहिए जिनकी वजह से मोल्दोवा को रूस की छत्रछाया से बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है।
इस मामले पर मोल्दोवा के लोगों की राय बंटी हुई है। मोल्दोवा ने रूस के यूक्रेन के खिलाफ पूरी तरह युद्ध छेड़ने के बाद मार्च, 2022 में पहली बार ईयू में शामिल होने के लिए आवेदन किया था। इस प्रक्रिया में औसतन नौ साल लगते हैं।
हालांकि मोल्दोवा की पोलिंग कंपनी ‘मेग्नेटा कंसल्टिंग’ के अनुसार इस कदम को लेकर देश की लगभग 34 लाख की आबादी की राय बंटी हुई है।
लगभग 48 प्रतिशत आबादी ने मार्च, 2023 में कहा था कि मोल्दोवा को ईयू में शामिल होना चाहिए जबकि 34 प्रतिशत ने रूस से रिश्ते बनाए रखने का समर्थन किया था।
नागरिकों की राय बंटी हुई होने के बावजूद मोल्दोवा रूस से दूर जाने की तैयारी कर चुका है।
मई, 2022 में सरकार ने रूस के नेतृत्व वाले ‘स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रमंडल’ से बाहर निकलने की इच्छा जाहिर की थी। ‘स्वतंत्र राष्ट्रों का राष्ट्रमंडल’ एक स्थानीय राजनीतिक एवं आर्थिक समूह है, जिसकी स्थापना 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद हुई थी।
हालांकि, मोल्दोवा में रूस का अभी भी राजनीतिक प्रभाव है। उदाहरण के लिए, रूस समर्थक राजनेता ने मई, 2022 में दक्षिणी मोल्दोवा के एक स्वायत्त क्षेत्र गागुजिया में गवर्नर का चुनाव जीता था।
सैंडू ने रूस पर मोल्दोवा की सरकार को उखाड़ फेंकने और क्रेमलिन के इशारे पर काम करने वाली कठपुतली सरकार स्थापित करने का आरोप लगाया है।
ईयू का हिस्सा बनने के लिए संगठन के सदस्य देशों के साथ औपचारिक रूप से बातचीत शुरू होती है, लेकिन इससे पहले इच्छुक देश को अलग-अलग शर्तों को पूरा करने की आवश्यकता होती है।
यूरोपीय आयोग ने मोल्दोवा से कहा है कि उसे अपने यहां नौ सुधार करने चाहिए। इनमें से छह सुधार न्याय क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने पर केंद्रित हैं।
मोल्दोवा सरकार अब 2023 के अंत तक ईयू में शामिल होने के लिए औपचारिक वार्ता की शुरुआत से पहले अपनी न्याय प्रणाली में व्यापक सुधार कर रही है।
हालांकि, कुछ मोल्दोवा के कुछ न्यायाधीश भ्रष्टाचार-रोधी सुधार के प्रयासों का विरोध कर रहे हैं, इसके तहत न्यायधीशों को पूर्व पुनरीक्षण प्रणाली से गुजरना पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप व्यापक रूप से न्यायाधीश इस्तीफे दे सकते हैं। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या कम होने से सर्वोच्च न्यायालय का कामकाज ठप हो जाएगा।
अप्रैल, 2023 में ईयू की संसद ने मोल्दोवा को ईयू का सदस्य बनाने का संकल्प दोहराया था, हालांकि कई तरह की अड़चनों को देखते हुए यह बता पाना मुश्किल है कि मोल्दोवा को ईयू की सदस्यता कब मिलेगी।
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