देश की खबरें | मोहन भागवत ने आरएसएस से जुड़े संगठन की शिक्षा बैठक का उद्घाटन किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने शुक्रवार को कहा कि उसका मानना है कि शिक्षा में जमीनी स्तर पर बदलाव मुख्य रूप से समाज की जिम्मेदारी है और इसके लिए समाज और सरकार दोनों के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं।
कोच्चि, 25 जुलाई राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने शुक्रवार को कहा कि उसका मानना है कि शिक्षा में जमीनी स्तर पर बदलाव मुख्य रूप से समाज की जिम्मेदारी है और इसके लिए समाज और सरकार दोनों के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं।
संगठन ने यहां निकटवर्ती वेलियानाड, पिरावोम में चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन के मुख्यालय आदि शंकर निलयम में आयोजित राष्ट्रीय चिंतन बैठक के पहले दिन एक बयान में कहा, "शिक्षा क्षेत्र से सीधे जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है, तभी प्रणाली में आधारभूत परिवर्तन किए जा सकते हैं।"
इसमें कहा गया है कि यह जारी कार्य एक राष्ट्रव्यापी अभियान और आंदोलन का हिस्सा है और शिक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना अनिवार्य है।
बैठक का उद्घाटन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि शिक्षा में भौतिकवाद और आध्यात्मिकता का संतुलन होना चाहिए।
बयान में कोठारी के हवाले से कहा गया है, "न्यास का कार्य और भारत की शिक्षा का रूपांतरण, दोनों अलग-अलग कार्य नहीं हैं। हमें न केवल समस्याओं की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, बल्कि समाधानों के साथ आगे बढ़ने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”
उन्होंने कहा, "यह कार्य इतना विशाल है कि ज्ञानोत्सव, ज्ञान कुंभ और ज्ञान सभा जैसे आयोजन ही पर्याप्त नहीं हैं। हमें इस मिशन को विस्तारित और गहन करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।"
अपने संबोधन में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अध्यक्ष पंकज मित्तल ने कहा अपनी स्थापना के बाद से ही न्यास ने पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक आवश्यकताओं के साथ मिश्रित करके भारतीय शिक्षा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है, तथा वर्तमान प्रणाली के लिए एक सार्थक विकल्प प्रस्तुत किया है।
मित्तल ने कहा, "भारत में शिक्षा का उद्देश्य कभी भी आजीविका तक सीमित नहीं रहा - यह एक संपूर्ण मानव बनने का मार्ग था। हमें अपनी शिक्षा प्रणाली को इसी दिशा में ले जाना चाहिए।"
बैठक शुरू होने से पहले, आरएसएस प्रमुख भागवत आदि शंकराचार्य की जन्मस्थली पर गए और चितविलासम सभागार में आयोजित सम्मेलन की शुरुआत के लिए पारंपरिक तौर पर दीप प्रज्जवलित किया।
दो दिवसीय बैठक का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत के दृष्टिकोण को समर्थन देने के लिए शैक्षिक सुधारों का रोडमैप तैयार करना है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 25, 2025 09:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

