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विदेश की खबरें | मोदी की ब्रिटेन यात्रा से पूर्व लंदन से हिंद-प्रशांत रणनीति को नया स्वरूप देने का आह्वान

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बहुप्रतीक्षित ब्रिटेन यात्रा और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर से पहले, देश के प्रमुख 'थिंक टैंक' ने मंगलवार को ब्रिटेन की हिंद प्रशांत रणनीति को नया स्वरूप देने का आह्वान किया। थिंक टैंक ने कहा कि यह रणनीति केवल व्यापार समझौते तक सीमित न रहकर भारत के साथ व्यापक साझेदारी को बढ़ावा देनी वाली होनी चाहिए।

विदेश की खबरें | मोदी की ब्रिटेन यात्रा से पूर्व लंदन से हिंद-प्रशांत रणनीति को नया स्वरूप देने का आह्वान
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

लंदन, 22 जुलाई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बहुप्रतीक्षित ब्रिटेन यात्रा और मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर से पहले, देश के प्रमुख 'थिंक टैंक' ने मंगलवार को ब्रिटेन की हिंद प्रशांत रणनीति को नया स्वरूप देने का आह्वान किया। थिंक टैंक ने कहा कि यह रणनीति केवल व्यापार समझौते तक सीमित न रहकर भारत के साथ व्यापक साझेदारी को बढ़ावा देनी वाली होनी चाहिए।

‘रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स’, जिसे आमतौर पर ‘चैथम हाउस’ के नाम से जाना जाता है, ने ‘ब्रिटेन के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता क्यों दी जानी चाहिए’ शीर्षक से एक शोध पत्र जारी किया है। इस शोध पत्र में चेतावनी दी है कि यदि रणनीति केवल द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित रही और व्यापक दक्षिण एशियाई क्षेत्र की अनदेखी की गई,जो भारत जैसी आर्थिक विकास गति पर नहीं है,तो यह ब्रिटेन के क्षेत्रीय हितों के लिए सीमित प्रभाव वाली साबित हो सकती है।

इसमें नयी दिल्ली के साथ ब्रिटेन के घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करने के लिए फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे अन्य देशों को शामिल करते हुए अधिक त्रिपक्षीय सहयोग का भी आह्वान किया गया है।

लंदन स्थित इस ‘थिंक टैंक’ के विश्लेषण में कहा गया है, ''दक्षिण एशिया में, भारत के साथ सीमित व्यापार समझौते को सफलतापूर्वक अंतिम रूप देने के बाद अब ब्रिटेन को चाहिए कि वह द्विपक्षीय सहयोग के दायरे को और विस्तृत करे, ताकि दोनों देशों की व्यापक विदेश नीति प्राथमिकताओं (जैसे अमेरिका और वैश्विक दक्षिण के साथ जुड़ाव) का बेहतर लाभ उठाया जा सके।''

भारत और ब्रिटेन ने छह मई को एक एफटीए पर सहमति व्यक्त की थी जिसका लक्ष्य 2030 तक दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को दोगुना करके 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है।

इस समझौते के मसौदे की अभी कानूनी समीक्षा चल रही है और उम्मीद है कि बृहस्पतिवार को मोदी की ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर के साथ होने वाली बैठक के दौरान इस पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।

इस दस्तावेज़ में कहा गया है, ‘‘मई 2025 में ब्रिटेन द्वारा भारत के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषणा, 2021 में नयी दिल्ली के साथ हुई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के प्रयासों का पूरक है।’’

चैथम हाउस के पत्र में कहा गया है, ‘‘लेकिन भारत की संरक्षणवादी प्रवृत्तियों को देखते हुए, किसी भी अंतिम समझौते के द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में व्यापक बदलाव लाने की संभावना कम है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि ब्रिटेन सरकार अन्य माध्यमों का भी समर्थन करे जो व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार कर सकें, जैसे कि 2024 में शुरू की गई प्रौद्योगिकी सुरक्षा पहल।’’

इसमें कहा गया कि व्यापक रूप से, पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं में समान प्रगति के अभाव में, भारत की अर्थव्यवस्था के कमोबेश अपने आप बढ़ने पर दांव लगाना एक खराब दांव होगा।

अपनी सिफारिशों में ‘थिंक टैंक’ ने ब्रिटेन से आग्रह किया है कि वह भारत के साथ ''महत्वपूर्ण '' राजनीतिक और आर्थिक संबंध विकसित करना जारी रखे, लेकिन साथ ही केवल द्विपक्षीय ब्रिटेन-भारत संबंधों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक क्षेत्रीय एकीकरण और विकास को प्राथमिकता दे।

इसमें कहा गया है, ‘‘ब्रिटेन को भारत के साथ अपने संबंधों को हाल ही में संपन्न (और लंबे समय से प्रतीक्षित) व्यापार समझौते से आगे ले जाना चाहिए और फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया या अमेरिका जैसे तीसरे देशों को शामिल करते हुए त्रिपक्षीय सहयोग को भी बढ़ावा देना चाहिए।”

इस पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दुनिया की अधिकांश आबादी रहती है और कुछ अनुमानों के अनुसार 2050 तक की अवधि में वैश्विक विकास में इसका योगदान 50 प्रतिशत से अधिक होगा।

यह शब्द हिंद और प्रशांत महासागरों के बीच के देशों के एक समूह को संदर्भित करता है, जिसमें दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान सहित प्रशांत क्षेत्र के देश शामिल हैं।

इसमें कहा गया है, ‘‘यह क्षेत्र ब्रिटिश हितों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ब्रिटेन को प्रभावित करने वाले सुरक्षा जोखिम शामिल हैं। यह क्षेत्र महत्वपूर्ण दीर्घकालिक आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है, लेकिन जलवायु जोखिमों के प्रति संवेदनशील है, जिसे यदि कम नहीं किया गया तो दुनिया पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सही दृष्टिकोण अपनाने से ब्रिटेन को अधिक शक्तिशाली, मुखर और विश्व स्तर पर प्रभावशाली चीन की चुनौतियों का सामना करने में भी मदद मिलेगी। बीजिंग की कार्रवाइयों को सीधे तौर पर प्रभावित करने की सीमित क्षमता के बावजूद, ब्रिटेन साझेदारों के साथ साझा मानदंड लागू करके चीन के पड़ोस को प्रभावित कर सकता है। ब्रिटेन क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता और लचीलेपन का समर्थन कर सकता है।’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 22, 2025 05:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).