नयी दिल्ली, 16 जून उच्चतम न्यायालय ने कथित मनरेगा घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में झारखंड कैडर की निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई शुक्रवार को 23 जून तक टाल दी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की 2000 बैच की अधिकारी सिंघल 18.07 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के कथित गबन मामले की मुख्य आरोपी हैं। उस वक्त वह खूंटी जिले की उपायुक्त थीं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एक अवकाशकालीन पीठ ने झा को कोई अंतरिम संरक्षण देने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप गंभीर हैं और यह उचित होगा कि वह आत्मसमर्पण करें और नियमित जमानत की मांग करें।
झा की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह एक व्यवसायी हैं और अग्रिम जमानत की मांग कर रहे हैं क्योंकि उनकी बेटी गंभीर बीमारियों से पीड़ित है। वकील ने कहा कि इस अदालत ने उनकी पत्नी को बेटी की देखभाल के लिए दो बार अंतरिम जमानत दी है।
अदालत ने वकील से कहा, ‘‘इन गतिविधियों में शामिल होने से पहले आपको यह सब सोचना चाहिए था। हम आपको इस तरह के मामले में अग्रिम जमानत देने के पक्ष में नहीं हैं।’’
वकील ने दलील दी कि चूंकि शीर्ष अदालत अग्रिम जमानत देने के पक्ष में नहीं है, इसलिए यह उचित होगा कि किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को किसी अन्य पीठ के समक्ष इस मामले को रखने की अनुमति दी जाए। शीर्ष अदालत की पीठ आमतौर पर जूनियर वकीलों को प्रोत्साहित करने के लिए छुट्टियों के दौरान वरिष्ठ वकीलों की दलीलें नहीं सुनती हैं।
पीठ ने कहा, “हां, हम इस मामले को अगले सप्ताह के लिए टाल सकते हैं। आप अगली अवकाशकालीन पीठ से मौका ले सकते हैं, लेकिन फिलहाल हम आपको कोई राहत देने के इच्छुक नहीं हैं। हो सकता है कि दूसरी पीठ वरिष्ठ अधिवक्ताओं को बहस करने की अनुमति दे।”
न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि वह उस पीठ का हिस्सा थे जिसने पूजा सिंघल को अंतरिम जमानत दी थी और मामले के तथ्यों को जानते हैं।
शीर्ष अदालत ने तीन जनवरी और 10 फरवरी को सिंघल को धनशोधन मामले में उनकी बीमार बेटी की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत दी थी।
शीर्ष अदालत 12 जून को झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली झा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई थी।
उच्च न्यायालय ने 18 मई को झा की याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें चार सप्ताह के भीतर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने को कहा था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सिंघल से शादी के बाद झा की आर्थिक स्थिति में उछाल आया और नकदी उनके बैंक खातों में आने लगी। अभियोजन पक्ष का दावा है कि यह रकम कथित तौर पर सिंघल के भ्रष्ट कार्यों से कमाई गयी आय का हिस्सा था।
झा ने दावा किया है कि यह पैसा ऑस्ट्रेलिया में नौकरी से उनकी वैध आय थी।
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