आइजोल, 23 जनवरी आइजोल की एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में लाई स्वायत्त जिला परिषद (एलएडीसी) के मुख्य कार्यकारी सदस्य वी. जिरसंगा को चार साल जेल की सजा सुनाई।
विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के न्यायाधीश एचटीसी लालरिंचना ने जिरसंगा पर चार लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया और जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में उन्हें दो साल की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी।
अदालत ने 19 जनवरी को जिरसंगा और तीन अन्य व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 1.33 करोड़ रुपये की हेराफेरी का दोषी ठहराया था। जिरसंगा तब शिक्षा (माध्यमिक स्कूल) के एलएडीसी के प्रभारी कार्यकारी सदस्य थे।
सजा की घोषणा सोमवार को की गई।
विशेष अदालत ने लॉन्गतलाई के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी लालदुना चिनजाह को चार साल जेल की सजा सुनाई और उन पर छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
थिंगकाह गांव के तत्कालीन माध्यमिक स्कूल प्रधानाध्यापक पीसी मुअनकिमा और जिले में माध्यमिक स्कूल शिक्षक संघ के तत्कालीन सचिव सी. लालचविलियाना को भी क्रमशः पांच साल और चार साल जेल की सजा सुनाई गई थी।
मुअनकिमा पर जहां छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, वहीं लालचाविलियाना पर चार लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
विशेष अदालत ने फर्जी तरीके से नियुक्ति पाने वाले 30 शिक्षकों व शिक्षकेतर कर्मचारियों को भी दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें छह-छह लाख रुपये जुर्माना भरने को कहा है।
यह कथित अनियमितता लॉन्गतलाई के 18 माध्यमिक स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के नियमितीकरण से संबंधित है।
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