देश की खबरें | केरल सरकार की फिल्म संगठनों से मुलाकात पर मिलीजुली प्रतिक्रिया, डब्ल्यूसीसी ने बताया ‘निराशाजनक’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल सरकार द्वारा न्यायमूर्ति हेमा आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा के लिए बुधवार को बुलाई गई बैठक पर फिल्म संगठनों की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रिया आई है।

तिरुवनंतपुरम, चार मई केरल सरकार द्वारा न्यायमूर्ति हेमा आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा के लिए बुधवार को बुलाई गई बैठक पर फिल्म संगठनों की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रिया आई है।

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति हेमा आयोग की रिपोर्ट मलयालम फिल्मों में महिलाओं के मुद्दों से संबंधित है।

वुमेन इन सिनेमा कलेक्टिव (डब्ल्यूसीसी) ने इस बैठक को ‘‘निराशाजनक’’ करार दिया, वहीं अन्य संगठनों ने हेमा आयोग द्वारा की गई अधिकतर अनुशंसाओं का स्वागत किया।

फिल्म उद्योग में महिला समर्थक डब्ल्यूसीसी के प्रतिनिधियों ने मांग की कि इस रिपोर्ट को यथाशीघ्र सार्वजनिक किया जाना चाहिए। हालांकि, केरल के संस्कृति मामलों के मंत्री सजी चेरियन ने सरकार के इस रुख को दोहराया कि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी क्योंकि इसमें फिल्म उद्योग में काम कर रहीं कई महिलाओं की व्यक्तिगत जानकारी है। चेरियन ने इस बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक कक्ष के बाहर आने के बाद डब्ल्यूसीसी के पदाधिकारियों ने संवाददाताओं से कहा कि न केवल सुझाव बल्कि आयोग की टिप्पणी और तथ्य भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि वास्तविक आंकड़ों के बिना बैठक में अनुशंसाओं की जानकारी देना अस्पष्ट लगता है।

एक डब्ल्यूसीसी सदस्य ने कहा कि आयोग के सुझावों को कैसे लागू किया जाएगा, बुधवार की बैठक में इसको लेकर भी स्पष्टता नहीं थी।

डब्ल्यूसीसी सदस्य और अभिनेत्री पद्मप्रिया ने कहा कि यह थोड़ा निराशाजनक था कि आयोग की अनुशंसाएं ’’बहुत ही लचर तरीके से परिभाषित की गई हैं।’’

इस बीच, एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट (एएमएमए) के प्रतिनिधि और अभिनेता सिद्दीकी ने कहा कि बैठक सकारात्मक रही और सरकार द्वारा बैठक में पेश किए गए 90 प्रतिशत सुझावों का उनके संगठन ने स्वागत किया।

निर्माता संघ का प्रतिनिधित्व करने वाले निर्माता सुरेश कुमार ने कहा कि फिल्म में नियामक प्राधिकरण बनाने के सुझाव को लागू नहीं किया जा सकता लेकिन बैठक में सामने आए अधिकतर सुझावों को लागू करने में कोई समस्या नहीं है।

सरकार ने कहा था कि तीन सदस्यीय न्यायमूर्ति के हेमा आयोग ने ही रिपोर्ट को गुप्त रखने की मांग की थी। सरकार ने कहा कि हेमा आयोग किसी जांच आयोग की परि के तहत नहीं आता। गौरतलब है कि आयोग ने वर्ष 2019 में ही अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी।

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