देश की खबरें | कई साल से कांग्रेस के कार्यक्रमों में नहीं दिखीं मिर्धा: डोटासरा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से पार्टी पर असर पड़ने की आशंकाओं को एक तरह से खारिज करते हुए सोमवार को कहा कि वह कई साल से पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो रही थीं।
जयपुर, 11 सितंबर राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने से पार्टी पर असर पड़ने की आशंकाओं को एक तरह से खारिज करते हुए सोमवार को कहा कि वह कई साल से पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो रही थीं।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस नागौर जिला समेत पूरे राजस्थान में सशक्त है और राज्य में दोबारा चुनाव जीतकर अपनी सरकार बरकरार रखेगी।
उल्लेखनीय है कि नागौर से कांग्रेस सांसद रहीं ज्योति मिर्धा सोमवार को नयी दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा की राजस्थान इकाई के प्रमुख सीपी जोशी तथा प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने उनका पार्टी में स्वागत किया।
राज्य में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बारे में पूछे जाने पर डोटासरा ने यहां संवाददाताओं से कहा,‘‘ज्योति मिर्धा जी पिछले साढ़े चार साल से कांग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में नहीं देखी जा रही थीं तो स्वाभाविक है कि उनका मन कोई आज नहीं बदला है... उनका मन पिछले काफी दिनों से बदला हुआ था।’’
डोटासरा ने कहा,‘‘उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पीहर पक्ष से कांग्रेस की रही है और ससुराल पक्ष से भाजपा की रही है... वे बड़े औद्योगिक घराने से संबंध रखती हैं... कोई दबाव होगा या उनका मन बदला होगा, मैं कुछ नहीं कह सकता।’’
उन्होंने आगे कहा,‘‘... मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं तो इतना कह सकता हूं कि तीन साल से तो मैं अध्यक्ष हूं। कभी भी कांग्रेस के किसी भी कार्यक्रम में ज्योति मिर्धा जी नहीं आईं। इसलिए वे भाजपा में शामिल हुईं तो उनको मुबारक हो। हमें कोई तकलीफ नहीं है।’’
पार्टी में कार्यकर्ताओं की अनदेखी के मिर्धा के आरोप पर डोटासरा ने कहा कि तीन साल से वह अध्यक्ष हैं, लेकिन एक बार भी मिर्धा ने किसी समस्या को लेकर उन्हें फोन नहीं किया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि किस आधार पर वह ऐसा कह रही हैं, ये तो वही जानें।
कुछ पूर्व नौकरशाहों के भाजपा में शामिल होने पर डोटासरा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जो लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग का डर सता रहा होगा।
आपदा प्रबंधन राहत मंत्री एवं कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष गोविंद राम मेघवाल ने कहा कि मिर्धा डूबते जहाज पर सवार हो गई हैं।
उन्होंने भाजपा में शामिल होने वाले सेवानिवृत्त नौकरशाहों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे गैर-राजनीतिक व्यक्ति हैं और इस भ्रम में भाजपा में जा रहे हैं कि राज्य में भाजपा सत्ता में आ रही है।
बीकानेर जिले से आने वाले मेघवाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री और बीकानेर सांसद अर्जुन राम मेघवाल को भी 60 साल की उम्र तक राजनीति की 'एबीसीडी' नहीं आती थी और फिर वे राजनीति में आ गए और अब प्रधानमंत्री की तारीफ करते रहते हैं।
इससे पहले राजस्थान के खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने ज्योति मिर्धा के कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामने पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि राजनीति किसी की मोहताज नहीं है और इसमें फैसला जनता करती है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है।
खाचरियावास ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘राजनीति में सबको अपना अधिकार है...चुनाव आ रहा है, कोई भाजपा, तो कोई कांग्रेस में जा रहा है...यह सब देखने को मिलेगा।’’
मिर्धा परिवार दशकों तक राजस्थान के मारवाड़ की राजनीति की धुरी रहा है। ज्योति मिर्धा के दादा नाथूराम मिर्धा की कांग्रेस और राज्य की राजनीति में अच्छी पकड़ थी। नाथूराम सांसद और विधायक भी रहे थे।
नाथूराम की पोती ज्योति मिर्धा पेशे से चिकित्सक हैं। उन्होंने 2009 में नागौर से लोकसभा चुनाव जीता, लेकिन 2019 का लोकसभा चुनाव हार गईं।
नागौर जाट बहुल इलाका है। पिछले कुछ वर्षों में इस इलाके में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नागौर सीट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल आरएलपी के लिए छोड़ दी थी।
आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल इस सीट से विजयी रहे और कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति मिर्धा को हार का सामना करना पड़ा। बेनीवाल बाद में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर राजग से अलग हो गए।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी सवाई सिंह चौधरी ने भी सोमवार को भाजपा का दामन थाम लिया। चौधरी ने 2018 का विधानसभा चुनाव खींवसर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लड़ा था।
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