जरुरी जानकारी | पोत परिवहन मंत्रालय ने भारतीय बंदरगाह विधेयक के संशोधित मसौदे पर हितधारकों से राय मांगी

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नयी दिल्ली, 18 अगस्त पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने भारतीय बंदरगाह विधेयक के संशोधित मसौदे पर अंशधारकों की राय मांगी है। मंत्रालय ने 30 अगस्त तक टिप्पणियां देने को कहा है।

यह प्रस्तावित विधेयक अनावश्यक देरी और जिम्मेदारियों को परिभाषित कर कारोबार सुगमता को बढ़ावा देगा। इसमें समुद्री क्षेत्र के विकास को एक समान और सुव्यवस्थित करना का भी प्रस्ताव है।

मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा कि प्रस्तावित विधेयक में राज्य के समुद्री बोर्डों को राष्ट्रीय ढांचे में शामिल किया जाएगा।

इसके तहत समुद्री राज्य विकास परिषद सहकारी संघवाद सुनिश्चित करेगा कि केन्‍द्र और राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें देश के लिए एक प्रगतिशील रूपरेखा तैयार करने की दिशा में मिलकर काम करेंगी।

बयान के अनुसार, कानून के अनावश्यक प्रावधानों को हटा दिया गया है या समसामयिक प्रावधानों के साथ बदल दिया गया है। साथ ही कानून में जुर्माने के पुराने पड़ चुके प्रावधानों को अद्यतन किया गया है। जुर्माने की राशि को मौजूदा परिप्रेक्ष्य के अनुरूप सुसंगत किया गया है।

भारतीय बंदरगाह कानून, 1908 दरअसल 110 वर्ष से अधिक पुराना है। इसलिए कानून को वर्तमान ढांचे के रूप में प्रतिबिंबित करने और भारत के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को इसमें शामिल करना अनिवार्य हो गया है।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह विधेयक और अधिक कंपनियों में विश्वास पैदा करने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि, व्यापक बाजार और संबद्ध रोजगार संभावनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

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