देश की खबरें | गुरुग्राम में प्रवासियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया: दीपांकर भट्टाचार्य
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी)लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शनिवार को आरोप लगाया कि गुरुग्राम में अवैध अप्रवासी होने के आरोप में पकड़े गए लोगों को एक अस्पष्ट आदेश के तहत मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया।
गुरुग्राम, 26 जुलाई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी)लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शनिवार को आरोप लगाया कि गुरुग्राम में अवैध अप्रवासी होने के आरोप में पकड़े गए लोगों को एक अस्पष्ट आदेश के तहत मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया।
उन्होंने शनिवार को गुरुग्राम में इन लोगों से मिलने के लिए नागरिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
अवैध अप्रवासियों की पहचान के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत आठ बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने गुरुग्राम जाने से पहले दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित जय हिंद कैंप का दौरा किया।
भट्टाचार्य ने बताया कि उन्होंने पाया कि शिविर के निवासी दो सप्ताह से अधिक समय से बिना बिजली के रह रहे हैं, क्योंकि उन पर बांग्लादेश से अवैध रूप से देश में आने का आरोप लगा था, जिसके बाद उनका कनेक्शन काट दिया गया था।
उन्होंने कहा कि यद्यपि इन लोगों को गुरुग्राम के शिविरों से रिहा कर दिया गया था, फिर भी पुलिस ने इन ‘विदेशियों’ की पहचान के लिए इस्तेमाल किए गए तरीकों के बारे में अस्पष्ट और असंतोषजनक जवाब दिए।
वाम नेता ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने पाया कि तलाशी गृह मंत्रालय के आदेश पर ली गई थी, लेकिन यह आदेश न तो सार्वजनिक तौर उपलब्ध था और न ही डीसीपी कार्यालय द्वारा इसे प्रतिनिधिमंडल के साथ साझा किया गया।
भट्टाचार्य के मुताबिक, हिरासत में लिए गए प्रवासियों ने दावा किया कि उन्हें कुछ लोगों ने घेर लिया और वे खुद को पुलिस बता रहे थे, लेकिन वे सादे कपड़ों में थे, बिना नंबर वाले वाहनों में आए थे, तथा उनके पास नाम या पहचान का कोई बैज नहीं था।
वाम नेता के मुताबिक सादे कपड़े में आए लोगों ने कई प्रवासियों को हिरासत में लिया और उन्हें अलग-अलग हिरासत केंद्रों में ले गए।
भट्टाचार्य ने कहा कि इन लोगों को पुलिस थानों में लंबे समय तक रखा गया, कुछ लोगों को तो एक सप्ताह तक रखा गया, जिसके दौरान कुछ लोगों ने शिकायत की कि उन्हें पुलिस की बर्बरता और शारीरिक यातना का सामना करना पड़ा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि रिहा किए जाने से पहले बंदियों को कोई ‘सत्यापन प्रमाणपत्र’ नहीं दिया गया, जिससे उन्हें भविष्य में हिरासत में लिए जाने और उत्पीड़न का खतरा बना हुआ है।
भाकपा (माले) लिबरेशन नेता ने दावा किया कि अधिकारियों ने ‘मनमाने’ तरीके से उनका सत्यापन किया, और बांग्ला भाषी या ‘मुस्लिम’ नाम वाले लोगों को निशाना बनाया।
उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने अपना सत्यापन ‘मनमाने’ तरीके से किया, तथा बांग्ला भाषी या ‘मुस्लिम’ नाम वाले लोगों को निशाना बनाया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 26, 2025 05:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

