कोरोना वायरस महामारी की वजह से खतरनाक इलाकों में फंसे प्रवासी

माना जा रहा है कि विभिन्न देशों द्वारा अपनी सीमा में प्रवेश देने से इनकार करने के बाद म्यामां के करीब 100 रोहिंग्या शरणार्थियों की बंगाल की खाड़ी में मौत हो चुकी है।

लॉकडाउन की वजह से प्रवासियों को सहारा के रेगिस्तान या ग्वाटेमाला से मैक्सिको की लगती सीमा में यहां अन्य जगहों पर छोड़ दिया गया। वहीं कई लोग यूरोपीय देशों और लीबिया के प्रशासन द्वारा अपने बंदरगाहों को असुरक्षित घोषित करने की वजह से समुद्र में फंसे हुए हैं।

माना जा रहा है कि विभिन्न देशों द्वारा अपनी सीमा में प्रवेश देने से इनकार करने के बाद म्यामां के करीब 100 रोहिंग्या शरणार्थियों की बंगाल की खाड़ी में मौत हो चुकी है।

कई सरकारों ने आपातकाल की घोषणा की है और उनका कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते जन स्वास्थ्य पर उत्पन्न खतरे के मद्देनजर असाधारण कदम उठाने की जरूरत है। हालांकि, सरकारों के ये कदम मानवाधिकार कानून के बावजूद प्रवासियों पर और सख्ती की हालिया कोशिश नजर आ रही है।

होंडुरास निवासी 37 वर्षीय फेनी जैक्लीन ऑर्टिज दो बेटियों (तीन साल और 12 साल) के साथ यात्रा कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने हमें फेंक दिया है।’’

ऑर्टिज अमेरिका पहुंची लेकिन वहां के प्रशासन ने उन्हें मैक्सिको के लिए निष्कासित कर दिया। मैक्सिको की सरकार ने 26 मार्च को उन्हें ग्वेटेमाला की सीमा पर छोड़ दिया। दो बसों में सवार ऑर्टिज और अन्य प्रवासियों से कहा गया कि वे सीमा पर ग्वेटामाला के सैनिकों की नजर में आने से बचें। इस समय ग्वेटामाला की सीमा कोरोना वायरस महामारी की वजह से बंद है।

ऑर्टिज ने कहा, ‘‘उन्हें कहा गया कि पहाड़ के रास्ते जाएं और हम जंगलों में सोए।’’

उन्होंने बताया कि अगले दो हफ्तों में कार्यकर्ताओं ने उनकी मदद की और 20 लोगों के समूह को होंडुरास की सीमा तक पहुंचाया।

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