देश की खबरें | गृह मंत्रालय आईपीएस अधिकारियों को और अधिक सीएपीएफ पद देने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा

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नयी दिल्ली, 24 अप्रैल केंद्रीय गृह मंत्रालय भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में कमांडेंट या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में प्रतिनियुक्ति पर लाने की पुरानी प्रणाली को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

वर्तमान नीति के अनुसार, आईपीएस अधिकारी सीमा सुरक्षा (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) जैसे सीएपीएफ में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर शामिल हो सकते हैं, जो कमांडेंट पद से एक रैंक अधिक है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) में आईपीएस अधिकारी कमांडेंट या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के पद पर कार्यरत होते हैं।

अधिकारियों ने कहा कि बीएसएफ, आईटीबीपी और सीआरपीएफ में भी कमांडेंट रैंक पर आईपीएस अधिकारी आया करते थे, लेकिन पिछले कुछ दशकों में प्रतिनियुक्ति पूल की कमी सहित विभिन्न कारणों से यह व्यवस्था खत्म हो गई।

नवीनतम कदम देश की सबसे बड़ी सीमा सुरक्षा इकाई बीएसएफ द्वारा ‘‘नीचे से शीर्ष नेतृत्व’’ प्रदान करने और आईपीएस अधिकारियों के लिए कार्य की पूरी छूट सुनिश्चित करने के उपाय के रूप में उठाया गया है।

इस महीने की शुरुआत में, बीएसएफ मुख्यालय ने गृह मंत्रालय (एमएचए) को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें सीएपीएफ में कमांडेंट के पद पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के प्रावधान को लेकर सीएपीएफ के भर्ती नियमों में संशोधन की मांग की गई थी। सीएपीएफ कैडर के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें डर है कि पहले से ही लंबित और रुकी हुई उनकी पदोन्नति और भी खतरे में पड़ जाएगी और अगर यह प्रस्ताव गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है तो वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

बीएसएफ कैडर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रस्ताव के एक बार लागू होने के बाद, कई अन्य मामलों के साथ-साथ वर्षों से चल रहे मुकदमेबाजी को और बढ़ावा मिलेगा। ये मामले एक संगठित अधिकारी संवर्ग सेवा के कारण उनकी पदोन्नति में लंबे समय तक देरी और उन्हें लाभ प्रदान करने से जुड़े हैं।

सीएपीएफ कैडर के एक अधिकारी ने पीटीआई- को बताया, ‘‘विभिन्न सीएपीएफ में पहले से ही कैडर अधिकारी एक ही रैंक पर 15-20 साल तक रहते हैं। कमांडेंट रैंक पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति हमारे करियर की प्रगति को और रोक देगी, क्योंकि एक निश्चित संख्या में पदों को आईपीएस के लिए आरक्षित करना होगा।’’

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