देश की खबरें | मेहुल चोकसी की ‘बैड ब्वॉय बिलियनियर्स’ की पूर्व स्क्रीनिंग के अनुरोध वाली याचिका खारिज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. न्यायमूर्ति नवीन चावला ने मामले पर दो घंटे सुनवाई करने के बाद चोकसी को किसी प्रकार की राहत देने से इनकार करते हुये कहा कि निजी अधिकार लागू कराने के लिये दायर रिट याचिका विचार योग्य नहीं है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

न्यायमूर्ति नवीन चावला ने मामले पर दो घंटे सुनवाई करने के बाद चोकसी को किसी प्रकार की राहत देने से इनकार करते हुये कहा कि निजी अधिकार लागू कराने के लिये दायर रिट याचिका विचार योग्य नहीं है।

अदालत ने कहा कि राहत के लिये उन्हें दीवानी वाद में जाना होगा। साथ ही अदालत ने उन्हें दीवानी वाद में यह मामला उठाने की छूट प्रदान की।

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न्यायमूर्ति चावला ने कहा, “मेरे विचार में निजी अधिकार लागू करने के लिए दायर याचिका विचार योग्य नहीं है। उपयुक्त उपाय दीवानी वाद होगा क्योंकि कथित उल्लंघन एक निजी अधिकार है। याचिका खारिज की जाती है। याचिकाकर्ता को यह मुद्दा दीवानी वाद में उठाने की छूट दी जाती है।”

गीतांजलि जेम्स का प्रवर्तक, चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी 13,500 करोड़ रुपये पीएनबी धोखाधड़ी मामले में आरोपी हैं।

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चोकसी पिछले साल देश छोड़ कर भाग गया था और उसे एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता दी गई थी।

इस वेब सीरीज को दो सितम्बर को भारत में रिलीज होना है।

नेटफ्लिक्स पर इसके बारे में यह बताया गया है कि “यह खोजी डॉक्यूमेंट्री भारत के सबसे कुख्यात उद्योगपतियों के लालच, फरेब और भ्रष्टाचार को बयां करती है।”

डॉक्यूमेंट्री की पूर्व स्क्रीनिंग के लिए दायर याचिका का नेटफ्लिक्स ने जबर्दस्त विरोध करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से गलत एवं दुष्टता भरी याचिका है।

नेटफ्लिक्स इंक और नेटफ्लिक्स इंटरटेनमेंट सर्विसेज इंडिया एलएलपी का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं नीरज किशन कौल और दायन कृष्णन ने कहा कि चोकसी घोषित भगोड़ा है और रिलीज से पहले उसे डॉक्यूमेंट्री देखने देने की अनुमति देना “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन” होगा।

चोकसी के वकील विजय अग्रवाल ने दलील दी कि उसके पास निष्पक्ष मुकदमे का अधिकार है जिस पर डॉक्यूमेंट्री के रिलीज का असर नहीं पड़ना चाहिए और नेटफ्लिक के तर्क का पुरजोर विरोध किया कि चोकसी भगोड़ा है।

अग्रवाल ने चोकसी की तरफ से कहा, “मैं भगोड़ा नहीं हूं। बंबई उच्च न्यायालय की ओर से मेरे पक्ष में एक रोक आदेश प्रभावी है। इन्होंने मुझे इस सुनवाई में 100 बार भगोड़ा कहा है और अदालत को गलत सूचना दी है। मैं अदालत से सीरिज को पहले ही देखने और मुझे बचाने की अपील करता हूं।’’

वकील ने दलील दी कि अमेरिकी कंपनी, नेटफ्लिक्स को भारतीय कानून एवं संविधान का सम्मान करना होगा अन्यथा इसे भी चीनी ऐप की तरह प्रतिबंधित कर देना चाहिए।

अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल चेतन शर्मा और केंद्र सरकार के स्थायी वकील अजय दिगपॉल ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते हए कहा कि ओवर द टॉप (ओटीटी) कंटेंट के नियमन या समीक्षा को लेकर कोई वैधानिक आदेश नहीं है।

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