मेगा पैकेज: रक्षा उत्पादन, कोयला, अंतरिक्ष, उड्डयन, नाभिकीय चिकित्सा क्षेत्र में बड़े नीतिगत कदम
इसके साथ ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिये वैसे हथियारों की उस सूची का विस्तार किया जायेगा, जिनका आयात नहीं किया जा सकता है।
नयी दिल्ली, 16 मई सरकार ने सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से शनिवार को कई बड़े सुधारों की घोषणा की। इनमें रक्षा विनिर्माण में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा में वृद्धि, छह अन्य हवाईअड्डों का निजीकरण, नागर विमानन क्षेत्र के लिए और अधिक वायु क्षेत्र खोलना और कोयले के वाणिज्यिक खनन में निजी क्षेत्र को प्रवेश देने के कदम शामिल शामिल है।
इसके साथ ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिये वैसे हथियारों की उस सूची का विस्तार किया जायेगा, जिनका आयात नहीं किया जा सकता है।
निजी क्षेत्र को ग्रहों की खोज और अंतरिक्ष यात्रा की भविष्य की परियोजनाओं के साथ-साथ उपग्रहों के प्रक्षेपण समेत भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी शामिल किया जायेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये करीब दो महीने से लागू लॉकडाउन की मार से अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिये घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त के उपायों की यहां एक संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी। पैकेज की चौथी किस्त बड़े पैमाने पर सुधारों और लगभग नगण्य हो चुके नये निवेश पर केंद्रित है।
सीतारमण ने कहा कि अब विदेशी निवेशकों को स्वचालित मार्ग के तहत रक्षा विनिर्माण उपक्रमों में 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की अनुमति होगी। अभी रक्षा विनिर्माण में एफडीआई की सीमा 49 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा मंजूरी मानदंडों के अधीन होगा।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार सालाना समयसीमा के साथ आयात के लिये प्रतिबंधित हथियारों व प्लेटफार्म की सूची का विस्तार करेगी। इसके साथ ही कुछ आयातित पुर्जों को देश में बनाने के कदम उठाए जाएंगे। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारी रक्षा आयात खर्च में कमी लाने में मदद मिलेगी।
आयुध की आपूर्ति में स्वायत्तता, जवाबदेही और दक्षता में सुधार के लिये सरकार आयुध निर्माण बोर्ड का निगमीकरण (कॉरपोरेटाइजेशन) करेगी, जिससे अंततः इन्हें घरेलू शेयर बाजारों में सूचीबद्ध किये जाने की दिशा में आगे बढ़ायेगा।
सीतारमण ने कहा, ‘‘निगमीकरण निजीकरण नहीं है।"
उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत परिचालन व रख-रखाव के लिये छह और हवाई अड्डों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह कुल 12 हवाई अड्डों में निजी कंपनियों से लगभग 13 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश प्राप्त होगा।
वित्त मंत्री ने भारतीय वायु क्षेत्र के उपयोग की पाबंदियों में ढील देने की भी घोषणा की, जिससे विमान कंपनियों को सुविधा और बचत होगी। सरकार का अनुमान है कि वायु क्षेत्र को अधिक खुला करने से नागर विमानन क्षेत्र को प्रति वर्ष लगभग 1,000 करोड़ रुपये का लाभ होगा।
अभी भारतीय वायु क्षेत्र का केवल 60 प्रतिशत स्वतंत्र रूप से उपयोग के लिये उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सीमा के उपयोग की पाबंदियों में ढील रक्षा मंत्रालय के परामर्श के आधार पर दी जायेगी, ताकि नागर विमानन परिचालन अधिक दक्ष हो सके।
सीतारमण ने कहा कि भारत को विमानों के रख-रखाव, मरम्मत और जीर्णोद्धार का गढ़ बनाने के कदम उठाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिये पहले ही मार्च में करों में कटौती की जा चुकी है।
उन्होंने कोयला क्षेत्र में सरकार का एकाधिकार समाप्त करने और इसे निजी क्षेत्र के लिये खोलने की भी घोषणा की। इसके तहत अब निजी कंपनियों कोयले के वाणिज्यिक खनन के साथ ही आंशिक तौर पर खोदे गये कोयला खंडों की नीलामी में भी हिस्सा ले सकेंगी।
उन्होंने कहा कि कोयला गैसीकरण और द्रवीकरण को राजस्व साझेदारी में छूट के माध्यम से प्रोत्साहित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कोयला बेड मीथेन (सीबीएम) के उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जायेगा।
तय समय से पहले उत्पादन की स्थिति में राजस्व साझा करने की दर में छूट देकर प्रोत्साहन दिया जायेगा। कोल इंडिया को 2023-24 तक एक अरब टन कोयला उत्पादन के लक्ष्य को पाने में मदद करने के लिये सरकार खान क्षेत्र से बाहर कोयला पहुंचाने के बुनियादी ढांचे के निर्माण में 50,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
सीतारमण ने खनिज क्षेत्र में निर्बाध खोज-खनन-उत्पादन व्यवस्था के जरिये सुधार करने और इसके तहत 500 खनन खंडों की नीलामी किये जाने की भी घोषणा की।
इसके अलावा बिजली उत्पादन की लागत में कमी लाकर एल्यूमिनीयम उद्योग की प्रतिस्पर्धिता बढ़ाने के लिये बॉक्साइट और कोयला खनिज खंडों की संयुक्त नीलामी की जायेगी।
सरकार ने खनन पट्टों के हस्तांतरण तथा इस्तेमाल से अधिक बचे खनिजों की बिक्री की मंजूरी देने के लिये कैप्टिव और नॉन-कैप्टिव खदानों के फर्क को भी समाप्त करने की घोषणा की। इससे खनन और उत्पादन में बेहतर दक्षता सुनिश्चित होगी।
वैसे खदान जिनसे निकलने वाले खनिजों का इस्तेमाल खुद ही करने की बाध्यता होती है, उन्हें कैप्टिव खदान कहा जाता है। नॉन-कैप्टिव खदान से निकाले गये खनिजों का कंपनियां खुद इस्तेमाल करने के साथ ही इन्हें बेचने के लिये भी स्वतंत्र होती हैं।
बिजली क्षेत्र के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में एक संशोधित बिजली शुल्क नीति जारी की जायेगी, जो उपभोक्ता-अधिकार, उद्योग को बढ़ावा देने और बिजली क्षेत्र की मजबूती पर केंद्रित होगी। उन्होंने कहा कि संशोधित नीति के तहत, बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को अपनी अक्षमता और नुकसान का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने की अनुमति नहीं दी जायेगी।
इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण किया जायेगा।
वित्त मंत्री ने सामाजिक ढांचागत परियोजनाओं में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिये इन्हें आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक बनाने को सरकार की ओर से दी जाने वाली वित्तीय मदद यानी वायबिलटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) बढ़ाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वीजीएफ के तहत 8,100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।
सीतारमण ने निजी क्षेत्र को उपग्रहों, प्रक्षेपणों और अंतरिक्ष-आधारित सेवा कारोबार जैसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में भूमिका देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी भागीदारी को बढ़ाने के लिये सरकार उपग्रहों, प्रक्षेपणों और अंतरिक्ष-आधारित सेवाओं में निजी कंपनियों के लिये बराबर के मौके प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार निजी कंपनियों के लिये विश्वसनीय नीति और विनियम बनायेगी।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को अपनी क्षमता में सुधार करने के लिये इसरो की सुविधाओं और अन्य प्रासंगिक संपत्तियों का उपयोग करने की अनुमति दी जायेगी।
ग्रहों की खोज और अंतरिक्ष पर्यटन की भविष्य की परियोजनाएं निजी क्षेत्र के लिये भी खुली होंगी।
उन्होंने कहा कि एक उदार भू-स्थानिक डेटा नीति बनायी जाएगी। उसके तहत तकनीक पर केंद्रित उद्यमियों को दूरस्थ संवेदी डेटा सुलभ हो सकेगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत चिकित्सकीय समस्थानिक (मेडिकल आइसोटोप) के उत्पादन के लिये पीपीपी मॉडल पर अनुसंधान केंद्रित रियेक्टर (नाभिकीय संयंत्र) स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सकीय समस्थानिक का उत्पादन करेगा और कैंसर एवं अन्य बीमारियों के लिये किफायती उपचार उपलब्ध करायेगा।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर तैयार होने वाला अनुसंधान रियेक्टर खाद्य संरक्षण, कृषि सुधाारों को तेजी तथा किसानों की मदद करने के लिये विकिरण प्रौद्योगिकी का उपयोग करेगा।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को राहत देने के लिये सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 10 प्रतिशत यानी 20 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की इस सप्ताह की शुरुआत में घोषणा की। इसमें 27 मार्च की तीन महीने के लिये गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न और नकदी के जरिये 1.7 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के माध्यम से 5.6 लाख करोड़ रुपये के किये गये उपाय भी शामिल हैं।
पिछले तीन दिनों में तीन किस्तों में सरकार ने 10.73 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की। तीन किस्तों में घोषित किये गये उपायों में छोटे व्यवसायों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, किसानों और गरीब प्रवासियों के साथ-साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), सूक्ष्त वित्त संस्थानों (एमएफआई) और बिजली वितरकों के लिये राहतें दी गयी हैं।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 16, 2020 08:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

