खेल की खबरें | रियो प्रदर्शन को भुलाकर नया अध्याय लिखना चाहेंगी मीराबाई चानू

तोक्यो, 23 जुलाई पूर्व विश्व चैम्पियन मीराबाई चानू से यहां तोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने की उम्मीद लगी है और यह भारतीय भी रियो ओलंपिक के निराशाजनक प्रदर्शन को भुलाकर देश के भारोत्तोलन इतिहास में नया अध्याय लिखना चाहेगी।

चानू भारत के लिये 49 किग्रा वर्ग में पदक की निश्चित दावेदार मानी जा रही हैं क्योंकि आठ महिलाओं भारोत्तोलकों में उनका 205 किग्रा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन केवल चीन की होऊ जिहुई के 213 किग्रा के बाद दूसरे नंबर है।

हालांकि उनके पदक को लेकर ‘हाइप’ बिलकुल ऐसी है जैसी पांच साल पहले रियो में थी जिसमें चानू छह प्रयासों में केवल एक ही बार वजन उठा सकी थीं जिससे उन्हें महिलाओं की 48 किग्रा स्पर्धा में ओवरऑल स्कोर नहीं मिल सका था।

मणिपुर की यह भारोत्तोलक इस बार निश्चित रूप से नया अध्याय लिखना चाहेंगी जिसमें पदक शामिल हो।

कर्णम मल्लेश्वरी एकमात्र भारतीय भारोत्तोलक हैं जिनके नाम ओलंपिक पदक है। उन्होंने 2000 सिडनी ओलंपिक में 69 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता था, जब भारोत्तोलन एरीना पहली बार महिलाओं के लिये खोला गया था।

रियो ओलंपिक के बाद चानू ने अपनी काबिलियत साबित की और लगभग हर बड़ी प्रतियोगिता में पदक जीते जिसमें विश्व चैम्पियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक भी शामिल है। इसके अलावा उन्होंने एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक भी जीता।

हाल के समय में उनका स्नैच वर्ग में प्रदर्शन महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में उनके लिये नुकसानदायक साबित हुआ है।

चानू स्वर्ण पदक जीतने की प्रबल दावेदार जिहुई से क्लीन एवं जर्क में बराबरी करने में सफल रही हैं लेकिन स्नैच में उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 88 किग्रा का प्रदर्शन चीनी भारोत्तोलक के 96 किग्रा के विश्व रिकार्ड के आगे फीका है।

उम्मीद है कि चानू क्लीन एवं जर्क में 119 किग्रा के अपने विश्व रिकार्ड को बेहतर करने की कोशिश करेंगी।

राष्ट्रीय कोच विजय शर्मा ने तोक्यो से कहा, ‘‘हमारे प्रतिद्वंद्वी चीन, अमेरिका और इंडोनेशिया से हैं। हमने स्नैच पर काम किया है। लेकिन अन्य कैसा कर रहे हैं, वजन का फैसला इससे ही होगा। हम बेकार में जोखिम नहीं लेना चाहते। ’’

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