देश की खबरें | उप्र में समय-पूर्व रिहाई मामलों पर विचार के तौर-तरीकों में सुधार किया जाए: न्यायालय

नयी दिल्ली, चार मई उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में पात्र कैदियों की समय से पहले रिहाई के मामलों पर समयोचित विचार सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित तौर-तरीकों में सुधार किया जाना चाहिए और कारागार महानिदेशक, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों की इस संबंध में एक बैठक बुलाई जाए।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि बैठक में होने वाली चर्चा के आधार पर एक अद्यतन नोट अदालत के समक्ष पेश किए जाए ताकि मामले में व्यापक आदेश पारित किया जा सके।

शीर्ष अदालत ने छह फरवरी को उत्तर प्रदेश में विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे जिले और राज्य की जेलों से ऐसे कैदियों के बारे में जानकारी जुटाएं, जो समय से पहले रिहाई के लिए पात्र हैं। सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार से संबंधित प्रावधानों का ‘‘सख्ती से’’ पालन करने को कहा था।

नालसा की ओर से पेश वकील ने बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान चर्चा के लिए एक नोट का हवाला दिया, जिसे अदालत में पेश किया गया था।

न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला भी इस पीठ में शामिल हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘वकील की बात सुनने के बाद, हमारा विचार है कि समय से पहले रिहाई के मामलों पर समयोचित विचार सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित तौर-तरीकों को ठीक किया जाना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए, आगामी सप्ताह नालसा के सचिव, इस मामले में पेश होने वाले वकील, कारागार महानिदेशक और उत्तर प्रदेश राज्य के प्रधान सचिव (कारागार) की एक बैठक बुलाई जानी चाहिए।’’

शीर्ष अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 15 मई की तारीख तय की।

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