देश की खबरें | उच्च न्यायालय के आदेश के कई दिन बाद एमसीडी स्थायी समिति के चुनाव परिणाम घोषित

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नयी दिल्ली, आठ जून दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की स्थायी समिति में आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन-तीन सदस्य होंगे। स्थायी समिति के लिए 24 फरवरी को हुए चुनाव के परिणामों की घोषणा बृहस्पतिवार को की गयी।

कुछ दिन पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्थायी समिति का पुन: चुनाव कराने के महापौर शैली ओबरॉय के फैसले को दरकिनार कर दिया था और उन्हें चुनाव परिणाम की घोषणा करने का निर्देश दिया था।

ओबरॉय ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद स्थायी समिति के सदस्यों के निर्वाचन के नतीजे की घोषणा कर दी गयी है।

उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली नगर निगम की आप सरकार समितियों का यथाशीघ्र गठन करने के लिए कटिबद्ध है।’’

एमसीडी की एक अधिसूचना के अनुसार, निर्वाचित पार्षदों के नामों की घोषणा निगम के सदन की बैठक के दौरान की गयी।

आप के मोहम्मद आमिल मलिक, मोहिनी और रामिंदर कौर तथा भाजपा की कमलजीत सहरावत, गजेंद्र सिंह दराल और पंकज लूथरा ऐसे छह पार्षद हैं, जो एमसीडी की स्थायी समिति के लिए निर्वाचित हुए हैं।

एमसीडी में आप सत्तारूढ़ दल है, लेकिन स्थायी समिति का चुनाव परिणाम निगम के कामकाज पर असर डाल सकता है क्योंकि सारे कार्यकारी निर्णय समिति द्वारा लिये जाते हैं और समिति में अब दोनों दलों के समान सदस्य हैं।

स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव फिर से कराने संबंधी महापौर के निर्णय को भाजपा पार्षदों-कमलजीत सहरावत और शिखा रॉय ने चुनौती दी थी, जिस पर उच्च न्यायालय ने 23 मई को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में निर्णय दिया था।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि आप से जुड़ीं महापौर ने चुनाव परिणाम ‘राजनीतिक रूप से प्रतिकूल’ पाने के बाद गलत तरीके से एक वोट को अवैध ठहरा दिया था तथा चुनाव प्रक्रिया रोक दी थी।

एमसीडी के सदन में 24 फरवरी को तब काफी हो-हल्ला हुआ था जब भाजपा और आप सदस्यों ने एक दूसरे के साथ धक्का-मुक्की की थी। ओबरॉय द्वारा चुनाव में एक वोट को अवैध घोषित कर दिए जाने के बाद सदन में नारे लगाये गए थे।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में ‘विवादित वोट’ को भाजपा पार्षद पंकज लूथरा के पक्ष में वोट मानने का निर्देश भी दिया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा था, ‘‘छह निर्वाचित उम्मीदवारों में भाजपा और आप के तीन-तीन सदस्य थे एवं जांच के बाद कोई भी वोट अवैध नहीं पाया गया तथा इसके बावजूद, महापौर ने एक वोट अवैध होने की घोषणा की। उन्होंने परिणाम की घोषणा करने के बजाय फिर से चुनाव कराने का एलान कर दिया।’’

राजकुमार सुरेश राजकुमार अविनाश

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