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जरुरी जानकारी | इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन के लिए अपनी उत्पादन लाइन को ‘लचीला’ बना रही है मारुति

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश की प्रमुख कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) अपनी उत्पादन क्षमताओं को लचीला बना रही है। इसके पीछे उद्देश्य एक ही विनिर्माण स्थल से इलेक्ट्रिक वाहन सहित अधिक मॉडल का उत्पादन करना है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

जरुरी जानकारी | इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन के लिए अपनी उत्पादन लाइन को ‘लचीला’ बना रही है मारुति

नयी दिल्ली, चार मई देश की प्रमुख कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) अपनी उत्पादन क्षमताओं को लचीला बना रही है। इसके पीछे उद्देश्य एक ही विनिर्माण स्थल से इलेक्ट्रिक वाहन सहित अधिक मॉडल का उत्पादन करना है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति ने 2030-31 तक बाजार में लगभग 28 विभिन्न मॉडल के साथ 20 लाख इकाई की उत्पादन क्षमता और जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

फिलहाल हरियाणा और गुजरात के अपने विनिर्माण संयंत्रों के साथ कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता सालाना 26 लाख इकाई की है। हरियाणा में गुरुग्राम और मानेसर में दो संयंत्र सालाना लगभग 16 लाख इकाई का उत्पादन करते हैं। खरखौदा में नए संयंत्र ने भी उत्पादन शुरू कर दिया है। शुरुआत में, नई सुविधा की वार्षिक उत्पादन क्षमता 2.5 लाख इकाई की होगी और यह कॉम्पैक्ट एसयूवी ब्रेजा का विनिर्माण करेगी।

कंपनी की एक इकाई सुजुकी मोटर गुजरात ने भी गुजरात में एक सुविधा स्थापित की है, जिसकी स्थापित उत्पादन क्षमता प्रति सालाना 7.5 लाख इकाई की है।

मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने विश्लेषकों से बातचीत में कहा, ‘‘उत्पादन योजना के संदर्भ में, हम अपने संयंत्रों को अधिक लचीला बना रहे हैं, ताकि अधिक लाइन अधिक मॉडल का उत्पादन कर सकें। और हम यह भी ध्यान रख रहे हैं कि स्थापित की गई नई लाइन इलेक्ट्रिक वाहन का भी विनिर्माण कर सकें।’’

मारुति इस साल सितंबर में अपना पहला इलेक्ट्रिक मॉडल ई-विटारा उतारने की की योजना बना रही है और पहले साल में अधिकांश उत्पादन विदेशी बाजारों में जाने की उम्मीद है। भारती ने कहा कि बैटरी के वजन की वजह से ईवी पारंपरिक मॉडल की तुलना में कहीं अधिक भारी वाहन हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, उस हिसाब से उत्पादन लाइन में कुछ अंतर है। लेकिन हम इसे लचीला बना रहे हैं, चाहे वह गुजरात में हो या खरखौदा (हरियाणा) में।’’

ईवी की लाभप्रदता के बारे में एक सवाल पर, उन्होंने कहा कि कंपनी इस बात से अवगत है कि डिजाइन के अनुसार ईवी की लाभप्रदता बहुत कम होगी और यह पूरे उद्योग के लिए सच है। भारती ने कहा, ‘‘हम ईवी से आईसी (परंपरागत) इंजन के समान लाभप्रदता की उम्मीद नहीं कर सकते। और अगर ऐसा होता, तो सरकार को शायद पांच प्रतिशत माल एवं सेवा कर (जीएसटी) या इतनी सारी योजनाएं या इतनी सारी समर्थन वाली नीतियां बनाने की जरूरत नहीं होती। इसलिए, हमें इसके बारे में सचेत रहना होगा।’’

उन्होंने कहा कि कंपनी कॉर्बन उत्सर्जन में कई नई प्रौद्योगिकियों के जरिये कमी लाएगी। हम अपने ईवी प्रयासों में सभी संभव प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करेंगे, जिससे कॉर्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके।

भारती ने कहा कि एकल घरेलू परिदृश्य की तुलना में निर्यात निश्चित रूप से हमारी कुछ मदद करेगा। ‘‘आपको को कुछ बाजारों और अन्य में मूल्य के मोर्चे पर लाभ मिल सकता है।’’

सख्त (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) सीएएफई-तीन नियमों को लागू किए जाने के विषय में उन्होंने कहा कि कंपनी इस मोर्चे पर कुछ अंतिम होने की उम्मीद कर रही है। इस नियम का मकसद कॉर्बन डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन को कम करना है।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 04, 2025 11:50 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).