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देश की खबरें | वैवाहिक बलात्कार: पति को मुकदमे से छूट संबंधी प्रावधान के खिलाफ याचिकाएं सूचीबद्ध करेगा न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय इस विवादास्पद कानूनी प्रश्न से संबंधित याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर मंगलवार को सहमत हो गया कि क्या अपनी बालिग पत्नी को यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने वाले पति को बलात्कार के अपराध वाले मुकदमे से छूट मिलनी चाहिए।

देश की खबरें | वैवाहिक बलात्कार: पति को मुकदमे से छूट संबंधी प्रावधान के खिलाफ याचिकाएं सूचीबद्ध करेगा न्यायालय

नयी दिल्ली, 16 जुलाई उच्चतम न्यायालय इस विवादास्पद कानूनी प्रश्न से संबंधित याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर मंगलवार को सहमत हो गया कि क्या अपनी बालिग पत्नी को यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करने वाले पति को बलात्कार के अपराध वाले मुकदमे से छूट मिलनी चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह की दलीलों का संज्ञान लिया कि संबंधित याचिकाओं को ‘कुछ प्राथमिकता’ दी जानी चाहिए।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि उन पर 18 जुलाई को सुनवाई हो सकती है।

हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत भी एक पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौनाचार बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है, बशर्ते वह नाबालिग नहीं है।

बीएनएस की धारा 63 (बलात्कार) के अपवाद-दो में कहा गया है कि ‘किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौनाचार बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है, यदि पत्नी की उम्र 18 वर्ष से कम नहीं है’।

शीर्ष अदालत ने 16 जनवरी, 2023 को भारतीय दंड संहिता के संबंधित प्रावधान पर आपत्ति जताने वाली कई याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा था, जिसके तहत बालिग पत्नी से जबरन यौन संबंध बनाने के मामले में पति को अभियोजन से छूट प्राप्त है।

शीर्ष अदालत ने 17 मई को इस मुद्दे पर बीएनएस के प्रावधान को चुनौती देने वाली एक समान याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था।

नये आपराधिक कानून, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, एक जुलाई से प्रभावी हुए हैं, जिन्होंने पुराने आपराधिक कानूनों का स्थान लिया है।

पीठ ने कहा था, ‘‘हमें वैवाहिक बलात्कार से संबंधित मामलों को सुलझाना है।’’

इससे पहले, केंद्र ने कहा था कि इस मुद्दे के कानूनी और सामाजिक निहितार्थ हैं, और सरकार इन याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करना चाहेगी।

इनमें से एक याचिका इस मुद्दे पर 11 मई, 2022 को दिल्ली उच्च न्यायालय के खंडित फैसले से संबंधित है। यह अपील एक महिला द्वारा दायर की गई है, जो दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष याचिकाकर्ताओं में से एक थी।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 16, 2024 08:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).