ताजा खबरें | लोकसभा में अनेक सदस्यों ने जनजातीय समुदायों के लिये समग्र विधेयक लाने, कोटा बढ़ाने की मांग की
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. लोकसभा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के कई समुदायों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने के लिये एक समग्र विधेयक लाने तथा इन समुदायों के कल्याण के लिए आवंटन एवं आरक्षण बढ़ाने की मांग की।
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर लोकसभा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के कई समुदायों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने के लिये एक समग्र विधेयक लाने तथा इन समुदायों के कल्याण के लिए आवंटन एवं आरक्षण बढ़ाने की मांग की।
लोकसभा में ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक, 2022’ पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने यह मांग की।
जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने उक्त विधेयक पेश किया जिसमें कर्नाटक के काडू कुरूबा एवं बेट्टा कुरूबा समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है।
चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से कर्नाटक के दो समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में डालने का प्रस्ताव किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को बढ़ाना चाहिए और उनके लिए विभागीय आवंटन बढ़ाना चाहिए, लेकिन सरकार इसके बजाए कर्नाटक में वोट बैंक की राजनीति कर रही है।
कांग्रेस सांसद ने अनुसूचित जातियों के प्रति हिंसा के मामले बढ़ने का आरोप लगाते हुए मांग की कि इन वर्गों की महिलाओं के कल्याण पर ध्यान दिया जाए।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उमेश जाधव ने कहा कि देश के छोटे-छोटे समुदाय के लोग लम्बे समय से उपेक्षा का शिकार रहे हैं और दुख झेलते आए हैं, उनकी सुध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ली है।
उन्होंने कहा कि काडू कुरूबा एवं बेट्टा कुरूबा समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने संबंधी यह विधेयक मोदी सरकार और कर्नाटक सरकार की पहल का प्रमाण है।
जाधव ने बंजारा, गौंड सहित कई अन्य समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किये जाने की मांग की।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने कहा कि वह कर्नाटक के काडू कुरूबा एवं बेट्टा कुरूबा समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने संबंधी इस विधेयक का समर्थन करती हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिये चार अलग-अलग विधेयक लाए गए हैं। मंडल ने कहा कि इसके बजाय विभिन्न समुदायों को इस सूची में शामिल करने के लिये एक समग्र विधेयक लाया जाना चाहिए।
मंडल ने कहा कि एक समय जनजातीय समुदाय आत्मनिर्भर था लेकिन समय के साथ उद्योगों, रेलवे, परिवहन सहित अन्य कार्यों के लिये उनकी जमीन ली गई और अब वे दूसरों पर आश्रित हो गए हैं।
कांग्रेस के सप्तगिरि उलाका ने सरकार से मांग की कि सरकार को आदिवासियों पर एक समग्र विधेयक लाना चाहिए और इस समुदाय के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)