देश की खबरें | मणिपुर हिंसा: सीओसीओएमआई विधानसभा का सत्र नहीं आहूत करने के लिए राज्य सरकार का बहिष्कार करेगी

इंफाल, छह अगस्त इंफाल की मणिपुर अखंडता समन्वय समिति (सीओसीओएमआई) ने विधानसभा का आपात सत्र नहीं बुलाने और राज्य में जारी अशांति से निपटने में कथित रूप से विफल रहने के लिए राज्य सरकार का बहिष्कार करने का फैसला किया है।

सीओसीओएमआई के संयोजक जितेंद्र निंगोम्बा ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह मौजूदा हिंसा के शांतिपूर्ण समाधान के लिए पांच अगस्त से पहले विधानसभा का एक आपात सत्र बुलाने की मांग पर ध्यान नहीं देने के लिए सरकार से निराश हैं।

उन्होंने कहा कि सीओसीओएमआई राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई किसी भी गतिविधि में सहयोग नहीं करेगी।

निंगोम्बा ने कहा, ‘‘हमने विधानसभा के आपात सत्र की मांग की थी। लेकिन राज्य सरकार हमारे अनुरोध पर कार्रवाई करने में विफल रही। इसने हमें इसका बहिष्कार करने के लिए मजबूर किया।’’

सीओसीओएमआई संयोजक ने बिष्णुपुर जिले के क्वाक्टा में हाल में हुई घटना की भी निंदा की जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी।

निंगोम्बा ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार ऐसे जघन्य कृत्य पर चुप रही जिसमें निर्दोष लोगों की जान चली गई।’’

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में हिंसा जारी रहने के कारण शनिवार शाम इंफाल पश्चिम जिले के लैंगोल गेम्स गांव में 15 मकानों में आग लगा दी गई थी। उन्होंने बताया कि यह घटना तब हुई जब भीड़ उग्र हो गई।

उन्होंने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

राज्य में मेइती समुदाय की आबादी लगभग 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं।

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