देश की खबरें | मणिपुर सरकार ने कई ‘वीआईपी’ व्यक्तियों की सुरक्षा में कटौती की

इंफाल, पांच जुलाई मणिपुर सरकार ने बड़ी संख्या में मंत्रियों, विधायकों, राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों की वीआईपी सुरक्षा में कटौती की है और मुक्त हुए इन 2,000 सुरक्षाकर्मियों को अब राज्य के संकटग्रस्त क्षेत्रों में खेती में लगे किसानों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

यह घटनाक्रम मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के उस बयान के दो दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि खेती का काम शुरू करने वाले किसानों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

एक सूत्र ने कहा, “कई मंत्रियों, विधायकों, अन्य राजनीतिज्ञों, लोक सेवकों, पूर्व नौकरशाहों की सुरक्षा कम कर दी गई है, जिससे लगभग 2,000 सुरक्षाकर्मियों को मुक्त किया गया है, जिन्हें मणिपुर में संकटग्रस्त क्षेत्रों में खेती में लगे किसानों की सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा।”

सोमवार को एकीकृत कमान की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद सिंह ने कहा था कि कृषि संबंधी गतिविधियां शुरू करने वाले किसानों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा था, “कृषि कार्य के लिए सरकार ने पांच जिलों में अधिक सुरक्षाकर्मी देने का निर्णय लिया है। कांगपोकपी, चुराचांदपुर, इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम और काकचिंग जिलों में लगभग 2,000 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे।”

ऐसी आशंकाएं रही हैं कि सुरक्षा चिंताओं के कारण किसान उन क्षेत्रों में अपनी कृषि गतिविधियां नहीं कर पाएंगे जहां इंफाल घाटी और पहाड़ी क्षेत्र मिलते हैं।

मेइती समुदाय के लोग जहां घाटी में रहते हैं वहीं कुकी पहाड़ियों में रहते हैं। दोनों समुदाय जातीय आधार पर बंटे हुए हैं, जिसके कारण पिछले दो महीनों में कई हिंसक घटनाएं हुई हैं।

मौजूदा माहौल को खराब करने वाली अफवाहों को रोकने के लिए मणिपुर में इंटरनेट पर प्रतिबंध को और बढ़ा दिया गया है।

मणिपुर में तीन मई को शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से अब तक लगभग 120 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 3000 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।

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