नयी दिल्ली, 15 जुलाई पोत परिवहन मंत्री मनसुख मांडविया ने कोच्चि बंदरगाह के वल्लारपदम टर्मिनल को ‘ट्रांसशिपमेंट’ केंद्र बनाने के सपने को हकीकत रूप देने के लिये अधिकारियों को रणनीति बनाने को कहा।
‘ट्रांसशिपमेंट’ केंद्र दरअसल पोत पर वो टर्मिनल है जो कंटेनरों को संभालता है, उन्हें अस्थायी रूप से रखता है और उन्हें आगे के गंतव्य के लिए अन्य जहाजों या परिवहन के अन्य साधनों में स्थानांतरित करता है।
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मंत्री ने बुधवार को टर्मिनल के विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिया। इसकी परिकल्पना भारत के पहले ‘ट्रांसशिपमेंट’ बंदरगाह के रूप में की गई है जिसे डीपी वर्ल्ड द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
कोच्चि इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांस-शिपमेंट टर्मिनल (आईसीटीटी) को स्थानीय तौर पर वल्लारपदम टर्मिनल के नाम से जाना जाता है। वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केरल के तट पर स्थित है।
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पोत परिवहन मंत्रालय ने मांडविया के हवाले से एक बयान में कहा, ‘‘हम भारतीय बंदरगाह पर ट्रांसशिपमेंट की सुविधा विकसित कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय कार्गो को भारतीय बंदरगाह के माध्यम से ही ट्रांसशिप किया जा सके। वल्लारपदम टर्मिनल के विभिन्न मुद्दों को हल करना पोत परिवहन मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।”
उन्होंने विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति बनाने और देश के ट्रांस-शिपमेंट केंद्र और दक्षिण एशिया में अग्रणी केंद्र के सपने को साकार करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।
बयानके अनुसार वल्लारपदम टर्मिनल ट्रांसशिपमेंट केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक सभी मानदंडों को पूरा करता है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों से इसकी निकटता शामिल है। साथ ही यह सभी भारतीय फीडर बंदरगाहों से कम से कम औसत समुद्री दूरी पर स्थित है।
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