देश की खबरें | ममता ने दुर्गा पूजा समितियों का अनुदान बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये किया, विपक्ष ने ‘चुनावी उपहार’ बताया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि उनकी सरकार राज्य भर में लगभग 40 हजार दुर्गा पूजा समितियों में से प्रत्येक को 1.10 लाख रुपये का अनुदान देगी, कर माफ करेगी तथा 80 प्रतिशत बिजली रियायत देगी।

कोलकाता, 31 जुलाई पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि उनकी सरकार राज्य भर में लगभग 40 हजार दुर्गा पूजा समितियों में से प्रत्येक को 1.10 लाख रुपये का अनुदान देगी, कर माफ करेगी तथा 80 प्रतिशत बिजली रियायत देगी।

इस घोषणा से आयोजकों में खुशी है जबकि विपक्ष ने इसकी आलोचना करते हुए इसे 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘‘चुनावी उपहार’’ करार दिया।

यहां नेताजी इनडोर स्टेडियम में पूजा समितियों की एक बड़ी समन्वय बैठक को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि पिछले साल की 85,000 रुपये की अनुदान राशि की तुलना में वित्तीय सहायता बढ़ाने का यह फैसला दुर्गा पूजा के सांस्कृतिक महत्व एवं यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) द्वारा मान्यता प्राप्त अमूर्त विरासत के रूप में इसकी स्थिति को मान्यता देता है।

बनर्जी ने कहा, ‘‘दुर्गा पूजा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह बंगाल की सांस्कृतिक पहचान की जीवनरेखा है, हमारा ‘प्राणेर उत्सव’ (हृदय का उत्सव) है। हमें गर्व है कि ‘यूनेस्को’ ने इसे मान्यता दी है। इस गौरव को संरक्षित करना हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।’’

बढ़े हुए अनुदान के साथ बनर्जी ने पूजा पंडालों के लिए बिजली बिलों में 80 प्रतिशत की छूट, अग्निशमन लाइसेंस शुल्क सहित राज्य सरकार के सभी शुल्कों में छूट तथा कोलकाता नगर निगम (केएमसी), पंचायतों और नगर पालिकाओं जैसी सरकारी एजेंसियों द्वारा पूजा समितियों को कर से पूरी तरह छूट दिए जाने की घोषणा की।

पिछले वर्ष दुर्गा पूजा समितियों में से प्रत्येक को 85,000 रुपये की अनुदान राशि दी गई थी।

बनर्जी ने कहा, ‘‘इस साल, अग्निशमन विभाग, नगर निकाय या कोई अन्य सरकारी सेवा प्रदाता कोई शुल्क नहीं लेगा। हम आपके साथ हैं ताकि आप बिना किसी आर्थिक तनाव के पूजा का आयोजन कर सकें।’’

ये घोषणाएं आवश्यक सामग्री और सेवाओं की बढ़ती कीमतों के बीच की गई हैं, जिसने पूजा समितियों, खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण बंगाल में आयोजन को लेकर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया था। कई आयोजकों के लिए राज्य सरकार से अनुदान अब उनके आयोजन के लिए वित्तीय राहत लेकर आया है।

अनुदान बढ़ाए जाने का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा कि राज्य ने 2018 में कैसे 10,000 रुपये के अनुदान से शुरुआत की थी और मुद्रास्फीति एवं उत्सव की बढ़ती लागत के चलते सरकार इस अनुदान में धीरे-धीरे इजाफा करती गई।

उन्होंने कहा कि 2019 में अनुदान राशि बढ़कर 25,000 रुपये हो गई, महामारी के दौरान दोगुनी होकर 50,000 रुपये हो गई और 2024 में बढ़कर 85,000 रुपये हो गई।

बृहस्पतिवार की घोषणा के साथ अब इसमें 25,000 रुपये की और वृद्धि हो गई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि इस वर्ष ‘दुर्गा पूजा कार्निवल’ पांच अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा और विसर्जन दो से चार अक्टूबर के बीच होगा।

सुरक्षित और समावेशी पूजा की आवश्यकता पर जोर देते हुए बनर्जी ने विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। पूजा समितियों को सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन निगरानी, वॉच टावर, महिलाओं के अनुकूल व्यवस्था और पंडालों में अलग-अलग प्रवेश-निकास बिंदु सुनिश्चित करने होंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी आयोजकों से एंबुलेंस तैयार रखने, भीड़ नियंत्रित करने, विसर्जन घाटों पर उचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने और किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह करती हूं।’’

बनर्जी ने कहा कि सांसद निधि कोष से खरीदी गई 300 एंबुलेंस का भी इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

बनर्जी ने कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस को भी पूर्ण समन्वय के साथ काम करने को कहा तथा मेट्रो रेलवे एवं परिवहन विभाग को त्योहारों के दौरान अतिरिक्त सेवाएं चलाने की सलाह दी।

मुख्यमंत्री ने पूजा समितियों से प्रवासी मजदूरों की मदद करने की एक भावुक अपील भी की।

उन्होंने कहा, ‘‘उनमें से कई लोग यातना और कठिनाई का सामना करने के बाद घर वापस आ रहे हैं। आइए, हम उनके साथ खड़े हों और इस त्योहार के समय में एकजुटता दिखाएं।’’

बनर्जी और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में यातना का सामना करना पड़ रहा है।

धार्मिक उत्सवों के लिए सार्वजनिक धन के वितरण की प्रथा को लेकर राज्य को इससे पूर्व कुछ नागरिक संगठनों की आलोचना और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था।

बनर्जी ने आलोचकों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘‘कुछ लोग तो यह कहते हुए अदालत भी चले गए कि ममता जी दुर्गा पूजा या सरस्वती पूजा की अनुमति नहीं देतीं। अब, जब हम समन्वय बैठकें आयोजित करते हैं और इन त्योहारों का समर्थन करते हैं, तो वे आपत्ति करते हैं।’’

विपक्ष ने इस कदम को ‘‘राजनीति से प्रेरित दान’’ करार देने में कोई देर नहीं लगाई।

भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के एक नेता ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘‘1.10 लाख रुपये पर क्यों रुके? इसे 2.10 लाख रुपये करें। इससे कुछ नहीं बदलेगा। पहले, सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान करें और छह लाख खाली सरकारी पदों को भरें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘देखते जाइए, अगली बार वह इमाम और ‘मुअज्जिन’ का मानदेय भी बढ़ाएंगी।’’

शुभेंदु अधिकारी और भाजपा के अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य 2026 के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव से पहले हजारों स्थानीय क्लबों और सामुदायिक आयोजकों का समर्थन हासिल करना है।

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले 2023 में भी इसी तरह की अनुदान वृद्धि की घोषणा की गई थी और तृणमूल कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया था।

आलोचनाओं को खारिज करते हुए तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि बनर्जी की पहल बंगाल के समावेशी सांस्कृतिक लोकाचार को दर्शाती है।

तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री का मानना है कि धर्म की भावना व्यक्तिगत है, लेकिन त्योहार सभी के लिए हैं। इस अनुदान के माध्यम से वह उन लोगों को सशक्त बना रही हैं जो हमारे सांस्कृतिक ताने-बाने को जीवंत रखते हैं।’’

पिछले साल आरजी कर अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर की मौत के बाद हुए आंदोलन के बीच कुछ पूजा समितियों ने सरकारी अनुदान लौटा दिया था। तब बनर्जी ने कहा था कि राज्य इस धनराशि को नए आवेदकों को हस्तांतरित करेगा। इस वर्ष ये समितियां बढ़ा हुआ अनुदान स्वीकार करेंगी या नहीं, यह अभी ज्ञात नहीं है।

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