नयी दिल्ली, 11 जुलाई मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने मंगलवार को कहा कि द्विपीय देश अपनी विदेश नीति में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाता है और एक देश को दूसरे देश के खिलाफ खड़ा नहीं करना चाहता ।
शाहिद ने 43वें सप्रू हाउस व्याख्यान में कहा कि मालदीव रणनीतिक और पारस्परिक रूप से लाभप्रद संबंधों को विकसित करने और बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि यह हिंद महासागर में व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों में उसे योगदान देने में सक्षम बनाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ इस संबंध में भारत अहम साझेदार है। राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने पद ग्रहण करने के बाद जो पहला काम किया वह था भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात। प्रधानमंत्री मोदी नवंबर 2018 में राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे।’’
शाहिद ने कहा कि भारत के साथ संबंध अनुकरणीय है और उसका समर्थन मालदीव के प्रत्येक सामाजिक और आर्थिक पहलू में महसूस किया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत का देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान है।’’
उन्होंने कहा कि मालदीव ने बहुत पहले से हिंद महासागर में संयुक्त राज्य अमेरिका की अपरिहार्य भूमिका को मान्यता दी है।
शाहिद ने कहा, ‘‘ हम आर्थिक और सामाजिक विकास के प्रयास में जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन और कई अन्य देशों के साथ बेहद महत्वपूर्ण और पारस्परिक रूप से लाभप्रद साझेदारी करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हम एक देश को दूसरे के समक्ष खड़ा नहीं करना चाहते या एक की कीमत पर दूसरे से संबंध नहीं बनाना चाहते । हम साझेदारी और सहयोग चाहते हैं। हमारी स्थिरता और समृद्धि क्षेत्र की स्थिरता और व्यवस्था में योगदान देती है।’’
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