यह शुल्क तब लगाया जायेगा, जब राष्ट्रों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के ‘नेट-जीरो फंड’ में पर्याप्त योगदान नहीं दिया हो तथा उनके जहाज अनुपालन लक्ष्य को पूरा नहीं कर रहे हों।
‘नेट जीरो फंड’ एक निवेश ढांचा है, जो ‘नेट जीरो’ लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कंपनियों और निवेशकों को प्रेरित करता है। यह फंड निवेशकों को कार्बन उत्सर्जन को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करने के वास्ते निवेश के अवसरों की पहचान करने में मदद करता है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के सदस्य इस समझौते पर पहुंच गए हैं जो 2028 तक प्रभावी हो जाएगा। इसमें अमेरिका की स्पष्ट रूप से गैर-मौजूदगी रही। समूह ने स्वच्छ ईंधन को चरणबद्ध तरीके से अपनाने के लिए समुद्री ईंधन मानक भी निर्धारित किया है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिछले दशक में नौवहन से होने वाले उत्सर्जन में वृद्धि हुई है - जो वैश्विक उत्सर्जन का लगभग तीन प्रतिशत है।
इसके अनुसार ऐसा इसलिए है क्योंकि जहाज और विशाल हो गए हैं, प्रति यात्रा अधिक माल पहुंचा रहे हैं और भारी मात्रा में ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आईएमओ महासचिव आर्सेनियो डोमिन्गुएज ने कहा कि समूह ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और नौवहन को आधुनिक बनाने की जटिल चुनौतियों का सामना करते हुए एक सार्थक आम सहमति बनाई है।
बैठक में मौजूद कुछ पर्यावरणविदों ने उत्सर्जन करों को एक ‘‘ऐतिहासिक निर्णय’’ बताया है।
अन्य समूहों ने आईएमओ के निर्णय का स्वागत किया और इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया।
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