देश की खबरें | मजीठिया की सुरक्षा घटाई गयी है, वापस नहीं ली गयी है : पंजाब के विशेष डीजीपी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा घटा दी गई है। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए उस दावे को खारिज कर दिया कि पूर्व मंत्री की सुरक्षा वापस ले ली गयी है।

चंडीगढ़, दो अप्रैल शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा घटा दी गई है। पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए उस दावे को खारिज कर दिया कि पूर्व मंत्री की सुरक्षा वापस ले ली गयी है।

अधिकारी का बयान शिअद नेता सुखबीर सिंह बादल द्वारा यह दावा किए जाने के एक दिन बाद आया है कि पंजाब सरकार ने मजीठिया की ‘जेड प्लस’ सुरक्षा वापस ले ली है। उन्होंने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा पूर्व मंत्री को परेशान किया जा रहा है।

विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अर्पित शुक्ला ने कहा कि मजीठिया की सुरक्षा वापस लिए जाने की खबरें सही नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा घेरा खतरे की आशंका के आधार पर प्रदान किया जाता है।

उन्होंने कहा, “सुरक्षा समीक्षा समिति समय-समय पर इसका आकलन करती है और खतरे की आशंका के आधार पर सुरक्षा बढ़ाने या घटाने का निर्णय लेती है।”

उन्होंने कहा, “अभी भी उनके पास पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल, एस्कॉर्ट वाहन और बंदूकधारी मौजूद हैं।”

पूर्व शिअद अध्यक्ष बादल ने मंगलवार को दावा किया कि पंजाब सरकार ने मजीठिया की सुरक्षा वापस ले ली है।

बादल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया था, “बिक्रम सिंह मजीठिया की पूरी जेडप्लस सुरक्षा वापस लेना, अकाली दल नेतृत्व के खिलाफ आम आदमी पार्टी सरकार की खतरनाक और घातक साजिशों की बिना किसी संदेह के पुष्टि करता है।”

मजीठिया ने भी उनकी जेड प्लस सुरक्षा वापस लेने के लिए राज्य सरकार की निंदा की थी।

पूर्व मंत्री ने कहा था, “जब वे मेरी आवाज दबाने में असफल रहे तो उन्होंने 29 मार्च की शाम को मेरी सुरक्षा वापस ले ली।”

भारतीय जनता पार्टी की पंजाब इकाई के प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी इस कदम की निंदा की थी।

उन्होंने कहा, “बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा राजनीतिक कारणों से हटाई गई है या नहीं, यह तो किसी और दिन बहस का विषय है, लेकिन मैं भगवंत मान सरकार को यह बताना चाहूंगा कि निजी सनक, स्वार्थ और राजनीतिक प्रतिशोध के चलते कभी भी ऐसे जल्दबाजी भरे फैसले नहीं लिए जाने चाहिए। किसी नेता की सुरक्षा वापस लेकर व्यक्तिगत हिसाब बराबर करना मुख्यमंत्री की कुर्सी का अपमान है, अगर मुख्यमंत्री को इसकी परवाह है तो।”

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