रायपुर, 11 फरवरी छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में हाल में हुई जिस मुठभेड़ में 31 नक्सलियों को मार गिराया गया, वहां पहुंचने के लिये सुरक्षा बलों ने पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के लॉन्च पैड का इस्तेमाल किया था। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
राज्य में नक्सलियों पर सबसे बड़े हमलों में से एक में सुरक्षाबलों ने रविवार को इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत एक पहाड़ी पर हुई मुठभेड़ में 11 महिलाओं सहित 31 नक्सलियों को मार गिराया। गोलीबारी में सुरक्षाबल के दो जवान भी मारे गए तथा दो अन्य घायल हो गए।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ''हमें माओवादियों की तेलंगाना राज्य समिति, पश्चिम बस्तर संभाग और राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र समिति के नक्सलियों के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के जंगलों में मौजूद होने की सूचना मिली थी। नक्सली मार्च और जून के बीच आयोजित किए जाने वाले उनके सामरिक अभियान ‘टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन’ (टीसीओसी) से पहले एक बैठक के लिए आए थे। इस अभियान के दौरान वे अपनी गतिविधियां बढ़ाते हैं।''
उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस की इकाई जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और बस्तर फाइटर्स के जवानों को सात फरवरी को क्षेत्र में अलग-अलग दिशाओं से रवाना किया गया था।
अधिकारी ने बताया, ''रणनीतिक रूप से कुछ दलों को पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र पुलिस के लॉन्च पैड से इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में भेजा गया था।''
उन्होंने बताया कि नौ फरवरी की सुबह, गश्ती दल एक पहाड़ी पर पहुंचा तब वहां नक्सलियों की गतिविधि देखी गई। जब सुबह लगभग आठ बजे सुरक्षा बलों ने पहाड़ी को घेरना शुरू किया, तब गोलीबारी शुरू हो गई।
अधिकारी ने बताया, ''गोलीबारी के दौरान नक्सली दो समूहों में बंट गए। एक समूह जिसमें तेलंगाना राज्य समिति के नक्सली शामिल थे, पीछे हटने लगे। जबकि दूसरा समूह गोलीबारी करता रहा।''
उन्होंने बताया कि इस दौरान महाराष्ट्र की ओर से घुसे गश्ती दलों ने नक्सलियों को चकित कर दिया, क्योंकि उन्हें उस दिशा से बलों की गतिविधि का अनुमान नहीं था। वे संख्या में कम थे।
अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में रुक-रुक कर गोलीबारी शाम करीब चार बजे तक जारी रही।
उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों के मार्ग बदलने की रणनीति ने अभियान में बड़ी सफलता हासिल करने में मदद की और इस अभियान में 31 नक्सलियों को मार गिराया गया।
अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ स्थल बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर और महाराष्ट्र सीमा से छत्तीसगढ़ के भीतर 40 किलोमीटर दूर है।
उन्होंने बताया कि तीन दिनों तक चले अभियान के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने लगभग 100 किलोमीटर पैदल यात्रा की।
अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने माओवादियों के शवों को अस्थायी स्ट्रेचर की मदद से लगभग पांच किलोमीटर दूर लाया, जिसके बाद हवाई सहायता मांगी गई।
उन्होंने बताया, ''सुरक्षा बलों के लिए 31 शवों को अपने कंधों पर लगभग 45 किलोमीटर पैदल चलकर लाना संभव नहीं था, क्योंकि वे सात फरवरी से अभियान में शामिल थे और पहले से ही थके हुए थे। इसलिए, शहीद जवानों और दो घायल कर्मियों के शवों को निकालने के साथ ही हमने नक्सलियों के शवों को हवाई मार्ग से ले जाने का भी फैसला किया।''
अधिकारी ने बताया कि पानी की कमी से पीड़ित कुछ जवानों, जिनमें ज्यादातर महिला कमांडो थीं, को भी हवाई मार्ग से बीजापुर ले जाया गया।
उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल से 24 हथियार और भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए गए हैं।
अधिकारी ने बताया कि मारे गए 31 नक्सलियों में से पांच की पहचान खूंखार नक्सलियों के रूप में की गई है, जिन पर कुल 25 लाख रुपये का इनाम है।
उन्होंने बताया कि इन पांच खूंखार माओवादियों में से माओवादियों की पश्चिम बस्तर संभाग समिति के सदस्य हुंगा कर्मा पर आठ लाख रुपये का इनाम है।
अधिकारी ने बताया, ''माओवादियों का पश्चिम और दक्षिण बस्तर संभाग बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों का सबसे मजबूत समूह है और पिछले एक साल में पश्चिम बस्तर संभाग के कई प्रमुख नक्सलियों को मार गिराया गया है।''
इस वर्ष अब तक राज्य में मारे गए 81 नक्सलियों में से 65 बस्तर संभाग में मारे गए। बस्तर संभाग में बीजापुर सहित सात जिले शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ में अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षा बलों ने 219 नक्सलियों को मार गिराया था।
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