मुंबई, चार सितंबर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जालना जिले में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज पर सोमवार को राज्य सरकार की ओर से खेद व्यक्त किया।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी शीर्ष अधिकारी ने पुलिस को लाठीचार्ज का आदेश नहीं दिया था। गृह विभाग का कार्यभार भी संभाल रहे फडणवीस ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस तरह के निर्णय (पुलिस बल का प्रयोग आदि) स्थानीय स्तर पर लिए जाते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र सरकार कुछ दिन पहले जालना जिले में पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग पर खेद व्यक्त करती है।’’
इससे पहले दिन में, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने दावा किया था कि लाठीचार्ज का आदेश मुख्यमंत्री और राज्य के गृहमंत्री के कार्यालय से किए गए फोन कॉल पर दिया गया था।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा) के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख ने भी यही दावा किया था कि महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय से फोन आने के बाद पुलिस ने जालना जिले में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया।
राज्य के पूर्व गृहमंत्री ने मांग की कि जालना जिले के पुलिस अधीक्षक को किसने फोन किया और उन्हें प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने का आदेश किसने दिया, यह पता लगाने के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराई जाए।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर जालना जिले के अंतरवाली सारथी गांव में भूख हड़ताल पर बैठे एक व्यक्ति को अधिकारियों ने गत शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की जिसका प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया और हिंसा भड़क गई थी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
हिंसा में 40 पुलिसकर्मियों सहित कई व्यक्ति घायल हुए थे और राज्य परिवहन की 15 से अधिक बसों में आग लगा दी गई थी।
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