देश की खबरें | महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र व्यर्थ गया, मंत्री विभाग न मिलने के कारण चुप रहे : विपक्ष

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नागपुर, 21 दिसंबर विपक्षी दलों ने शनिवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानमंडल का शीतकालीन सत्र केवल औपचारिकता के लिए आयोजित किया गया, क्योंकि विभाग आवंटन के अभाव में मंत्री किसानों और अन्य के मुद्दों को हल नहीं कर सके।

नागपुर में सत्र के छठे और अंतिम दिन संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने कहा कि सरकार ने विधानमंडल में केवल पुरानी योजनाओं और वादों को ही बताया है।

दानवे ने कहा, “हालांकि, महायुति सरकार का गठन 15 दिन पहले ही हो गया था और मंत्रिमंडल का विस्तार भी हो गया था, लेकिन विभागों का आवंटन अब तक नहीं हुआ है। इस सत्र में मंत्री बिना मंत्रालय के विधानमंडल में बैठे रहे। यह सत्र महज औपचारिकता थी।”

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, श्रमिकों और उद्योगों को आश्वस्त करने में विफल रही है।

संविधान की प्रतिकृति को नुकसान पहुंचाने को लेकर परभणी शहर में हुई हिंसा, न्यायिक हिरासत में एक आरोपी की संदिग्ध मौत, बीड में एक सरपंच की हत्या और कल्याण में एक मराठी परिवार पर हमले का जिक्र करते हुए दानवे ने कहा कि सरकार कानून- व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रही है।

दानवे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से सरकार में एक मंत्री का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, “बीड घटना का मुख्य आरोपी फरार है, जबकि महाराष्ट्र के लोग जानते हैं कि उसे कौन बचा रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कपास, सोयाबीन और धान उत्पादकों की दुर्दशा को कम करने के लिए उपायों की घोषणा नहीं की।

दानवे ने आरोप लगाया, “सत्र में पेश की गई अनुपूरक मांगें नियमित व्यय के लिए थीं। विकास कार्यों के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया गया। सरकार ने विदर्भ क्षेत्र के लिए सिंचाई परियोजनाओं की घोषणा की, लेकिन कोई धनराशि जारी नहीं की।”

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने राज्य संचालित एमएसआरटीसी में भ्रष्टाचार और फर्जी दवा घोटाले जैसे मुद्दे उठाए।

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि विपक्ष ने सत्र के दौरान किसानों, महंगाई और बिगड़ती कानून व्यवस्था से संबंधित मुद्दे उठाए।

उन्होंने दावा किया कि नवनियुक्त मंत्रियों में से 65 प्रतिशत दागी हैं।

पटोले ने पूछा कि क्या परभणी की घटना राज्य प्रायोजित थी?

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, “विधानसभा में मुख्यमंत्री के जवाब से ऐसा लगा कि वह बीड और परभणी की घटनाओं के आरोपियों को बचा रहे हैं। वह उनके वकील जैसे लग रहे थे।”

पटोले के मुताबिक, सरकार ने कहा था कि वह किसानों के लिए ऋण माफी की घोषणा करेगी, लेकिन उसने अपना वादा पूरा नहीं किया।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह सरकार किसानों, युवाओं और गरीबों के लिए काम नहीं करती, बल्कि चुनिंदा व्यापारियों के लिए काम करती है।’’

इससे पहले दिन में विपक्षी दलों ने कथित नकली दवा आपूर्ति घोटाले को लेकर विधान भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।

छह दिवसीय सत्र केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बी आर आंबेडकर पर टिप्पणी और परभणी और बीड की घटनाओं को लेकर हंगामेदार रहा।

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