देश की खबरें | महाराष्ट्र कृषि विश्वविद्यालय ने टिड्डी दल के प्रकोप से निपटने के तरीके सुझाए
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औरंगाबाद, 29 मई महाराष्ट्र और देश के दूसरे राज्यों में टिड्डी दल के प्रकोप के बीच एक कृषि विश्वविद्यालय ने टिड्डियों के अंडे नष्ट करने और फसलों को उनसे बचाने के लिए नीम के तेल का छिड़काव करने जैसे कुछ सुझाव दिये हैं।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में इस समय टिड्डी दल का प्रकोप बना हुआ है। इस सप्ताह की शुरुआत में टिड्डियों ने विदर्भ में धावा बोला था।
मराठवाड़ा के परभनी में स्थित वसंतराव नाइक कृषि विश्वविद्यालय ने कहा कि टिड्डी दल द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने और खाने की तलाश में लंबी दूरी तक उड़ान भरने के खतरे से निपटने के कुछ प्रभावी उपाय हैं।
विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि टिड्डियों की समस्या से निपटने के कुछ प्रभावी तरीकों में उनके अंडे नष्ट करना और खड़ी फसलों पर नीम के तेल का छिड़काव करना शामिल हैं।
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विश्वविद्यालय के कृषि कीटविज्ञान विभाग ने इस संबंध में किसानों के लिए बृहस्पतिवार को दिशानिर्देश जारी किये।
विश्वविद्यालय ने कहा, ‘‘मादा टिड्डियां नम जमीन में 50 से 100 तक अंडे देती हैं। प्रजनन की अवधि पर्यावरण पर निर्भर करती है और दो से चार सप्ताह तक हो सकती है। लार्वा अंडे से निकलकर तुरंत नहीं उड़ सकता।’’
संस्थान ने सुझाया है कि अंडों को नष्ट करना एक उपाय हो सकता है।
इसमें कहा गया है कि किसान 60 सेंटीमीटर चौड़ा और 75 सेंटीमीटर गहरा गड्ढा खोद सकते हैं जिसमें छोटे टिड्डों को पकड़ा जा सकता है।
विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने बताया कि लार्वा बड़े होने पर समूह में उड़ते हैं और पत्तियां, शाखाएं, फूल तथा बीजों को नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि रात के वक्त धुएं की मदद से भी टिड्डियों के बच्चों को नष्ट किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रति हेक्टेयर भूमि में 2.5 लीटर नीम तेल छिड़कने से भी इन पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी।
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