भोपाल, 13 फरवरी मुख्यमंत्री मोहन यादव नीत सरकार ने राज्य को ड्रोन विनिर्माण और प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए बृहस्पतिवार को ‘मध्य प्रदेश ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति 2025’ को मंजूरी दे दी। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि यह नीति ड्रोन के सुरक्षित और कुशल उपयोग के माध्यम से नवाचार, आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर केंद्रित है।
अधिकारी ने बताया, “भविष्य में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, जो अपने पायलट रहित स्वभाव के साथ विभिन्न क्षेत्रों में क्रांति लाएगा। ड्रोन अभिनव समाधान प्रदान करते हैं, समय पर डेटा संग्रह सुनिश्चित करते हुए मानव श्रम की आवश्यकता को काफी कम करते हैं। वे उच्च सटीकता और दक्षता के साथ कठिन पहुंच वाले क्षेत्रों तक पहुंचने में विशेष रूप से प्रभावी हैं।”
उन्होंने बताया कि नीति के प्रमुख स्तंभों में ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र, कौशल विकास, क्षेत्र संवर्धन और वित्तीय प्रोत्साहन शामिल हैं तथा यह तकनीकी संस्थानों में ड्रोन से संबंधित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देगा।
अधिकारी ने बताया कि ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र एआई (कृत्रिम मेधा) और नवीनतम तकनीक को बढ़ावा देगा।
उन्होंने बताया, “नई ड्रोन नीति के तहत राज्य की डीएसडीएम/डीईएस इकाइयों द्वारा किए गए निवेश के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगा। पूंजी निवेश पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपये तक), पट्टे के किराये पर 25 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति तीन वर्ष के लिए दी जाएगी, जिसकी सीमा पांच लाख रुपये प्रति वर्ष या जो भी कम हो। राज्य सरकार द्वारा पहचाने गए क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शुरू करने के लिए दो करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा।”
अधिकारी ने बताया, “मध्यप्रदेश में ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनने की क्षमता है। इसके लिए राज्य नवाचार को बढ़ावा देने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए ड्रोन के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करेगा। ये प्रयास मध्यप्रदेश को तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने में योगदान देंगे।”
उन्होंने बताया, “मुख्यमंत्री की ‘सीखो-कमाओ’ योजना के तहत प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षुओं को कौशल विकास में सहायता के लिए छह महीने तक आठ हजार रुपये प्रति माह मिलेंगे। प्रदर्शनियों या कार्यक्रमों में भागीदारी पर होने वाले खर्च के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा, जो घरेलू कार्यक्रमों के लिए एक लाख रुपये और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए दो लाख रुपये तक सीमित होगी।”
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