नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर भ्रष्टाचार विरोधी निकाय लोकपाल को इस वित्त वर्ष में अप्रैल से सितम्बर के बीच कुल 55 शिकायत प्राप्त हुई। इनमें से तीन शिकायत सांसदों के खिलाफ थी। आधिकारिक आंकड़े में यह जानकारी दी गई है।
इसके अनुसार कुल शिकायतों में से 22 ग्रुप ए और बी श्रेणी के केन्द्रीय सरकार के अधिकारियों, 26 विभिन्न बोर्ड/ निगम/ स्वायत्त निकायों के अध्यक्षों, सदस्यों और कर्मचारियों के खिलाफ थी, जो केन्द्र द्वारा पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषित थे और चार अन्य श्रेणी में थी।
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वर्ष 2020-21 के लिए सितम्बर के अंत तक अद्यतन किये गये लोकपाल के आंकड़ों के अनुसार प्रारंभिक जांच के बाद 28 शिकायतों को निपटाया गया।
इसमें कहा गया है कि 13 शिकायतों में लोकपाल ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिये थे जिनमें से 12 की जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और एक की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करेगी।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले वर्ष 23 मार्च को न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को लोकपाल के रूप में शपथ दिलाई थी। लोकपाल सार्वजनिक पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में जांच करने वाली शीर्ष संस्था है।
लोकपाल के आठ सदस्यों को न्यायमूर्ति घोष ने 27 मार्च को शपथ दिलाई थी।
हालांकि लोकपाल के सदस्यों में से एक न्यायमूर्ति अजय कुमार त्रिपाठी का इस वर्ष मई में निधन हो गया था। एक अन्य सदस्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोंसले ने पद से इस्तीफा दे दिया था।
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