ताजा खबरें | लोकसभा ने राष्ट्रीय औषध शिक्षा और अनुसंधान संस्थान संशोधन विधेयक को मंजूरी दी
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी का केंद्र’ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को कहा कि दूसरे देशों से आयात की जाने वाली 51 सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) अपने देश में बने, इसके लिये उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) शुरू की गई तथा चार फार्मा पार्क स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
नयी दिल्ली, छह दिसंबर भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी का केंद्र’ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को कहा कि दूसरे देशों से आयात की जाने वाली 51 सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) अपने देश में बने, इसके लिये उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) शुरू की गई तथा चार फार्मा पार्क स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
लोकसभा में ‘राष्ट्रीय औषध शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (संशोधन) विधेयक 2021’ पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि 51 सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) की पहचान की गई जिनका हम दूसरे देशों से आयात करते हैं। अगर हम भारत में इन्हें नहीं बनायेंगे तो कभी संकट पैदा हो सकता है।
मांडविया ने कहा कि ये 51 एपीआई अपने देश में बने, इसके लिये उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) शुरू की गई। इसके तहत भारत में इनके उत्पादन के लिये प्रोत्साहन दिया जायेगा।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा 4 फार्मा पार्क बनाना तय किया गया है। हम देश में काफी मात्रा में एपीआई विनिर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें दुनिया में भारत को फार्मेसी का केंद्र बनाना है जो न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करे बल्कि दुनिया की आवश्यकताओं को भी पूरा करे।
मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने कुछ सदस्यों द्वारा पेश संशोधनों को नामंजूर करने के बाद विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
मांडविया ने कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि सभी राज्यों में 20 करोड़ से अधिक टीकों की खुराक शेष हैं और सभी क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में कोविड रोधी दो अन्य टीके आने वाले हैं जो परीक्षण के तीसरे चरण से गुजर रहे हैं।
मंत्री ने विधेयक का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य कई औषध संस्थाओं को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा देने, वहां स्तानक स्तर की डिग्री को मंजूरी देना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान अधिनियम, 1998 मोहाली स्थित राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने के लिये लाया गया था। इसके बाद अहमदाबाद, हाजीपुर, गुवाहाटी, हैदराबाद, रायबरेली और कोलकाता में ऐसे संस्थान स्थापित किये गए।
यह विधेयक ऐसे ही संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देने के लिये लाया गया है। इसमें औषधि शिक्षा में अनुसंधान, एकीकृत पाठ्यक्रम लाने के साथ स्नातक, स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट डिग्री जैसे पाठ्यक्रमों का विस्तार करने की बात कही गई है।
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