ताजा खबरें | लोकसभा ने ‘अंतर सेना संगठन कमान, नियंत्रण और अनुशासन विधेयक’ को मंजूरी दी
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. सशस्त्र बलों के संयुक्त अभियानों के दौरान अनुशासन बनाये रखने के लिए त्वरित कार्रवाई के प्रावधान वाले ‘अंतर सेवा संगठन (कमान, नियंत्रण और अनुशासन) विधेयक, 2023’ को लोकसभा ने शुक्रवार को पारित कर दिया।
नयी दिल्ली, चार अगस्त सशस्त्र बलों के संयुक्त अभियानों के दौरान अनुशासन बनाये रखने के लिए त्वरित कार्रवाई के प्रावधान वाले ‘अंतर सेवा संगठन (कमान, नियंत्रण और अनुशासन) विधेयक, 2023’ को लोकसभा ने शुक्रवार को पारित कर दिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में मणिपुर के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच विधेयक को चर्चा और पारित करने के लिए रखा । इस पर हुई संक्षिप्त चर्चा पर रक्षा मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी।
सदन में सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्ति में बैठने वाले रक्षा मंत्री और सदन के उपनेता राजनाथ सिंह ने आसन के समीप विपक्षी सदस्यों के नारेबाजी करने और तख्तियां दिखाने के कारण पीछे की पंक्ति में जाकर विधेयक प्रस्तुत किया और उस पर हुई चर्चा का जवाब दिया।
उन्होंने अपने उत्तर में कहा कि यह विधेयक मौजूदा सेना संबंधी कानूनों में किसी भी तरह के बदलाव का प्रस्ताव नहीं करता और केंद्र सरकार को अंतर सेना संगठनों के गठन की शक्ति प्रदान करने का प्रस्ताव भी करता है।
इससे पहले सिंह ने विधेयक प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नये-नये सुधारों के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है और पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने हर क्षेत्र में नई पहल की हैं।
सिंह ने कहा कि उक्त विधेयक भी इसी कड़ी में बहुत महत्वपूर्ण विधेयक है जो दो महत्वपूर्ण उद्देश्यों को एक साथ पूरा करता है और तीनों सेनाओं के एकीकरण और उनके संयुक्त अभियान चलाने की दिशा में बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि इससे भविष्य की चुनौतियों का एकजुट होकर मुकाबला किया जा सकेगा और यह अंतर सेवा संगठनों में अनुशासन को मजबूत करेगा।
सिंह ने कहा कि सेना में कभी भी किसी परस्थिति में अनुशासनहीनता का कोई मामला सामने आने पर जल्द निर्णय लेना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी अंतर सेना संगठन में अनुशासन बनाये रखने के लिए त्वरित कार्रवाई का प्रावधान करता है।
सिंह ने कहा कि तीनों सेनाओं के कर्मी अपने-अपने संबंधित कानूनों और उनके तहत बनाये गये नियमों के अनुसार काम करते हैं। ऐसी स्थिति में अंतर सेना संगठनों में काम करने वाले कर्मियों के आनुशासनिक मामलों में कमांडर-इन-चीफ केवल अपने बल के कर्मियों पर अनुशासन और प्रशासनिक अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं और दूसरे बल के कर्मियों पर नहीं।
उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों में सेवारत कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उनकी मूल सेना इकाइयों में वापस भेजना अपेक्षित होता है। सिंह ने कहा कि इसमें धन और समय व्यय होता है और न्याय मिलने में देरी होती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि एक ही अपराध के लिए अलग-अलग प्राधिकारों के अलग-अलग निर्णयों से विसंगति पैदा होती है।
उन्होंने कहा कि इस लिहाज से सभी अंतर सेना संगठनों के प्रमुखों के लिए, उनमें अनुशासन बनाये रखने के नाते एक कानून बनाने की आवश्यकता लगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह विधेयक अंतर सेना संगठनों के प्रमुखों को बेहतर अनुशासन और प्रशासनिक अधिकार प्रदान करता है।
सिंह ने कहा, ‘‘मैं इस सदन को आश्वस्त सकता हूं कि सैन्य सुधारों की दिशा में इस महत्वपूर्ण विधेयक से कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ने वाला।’’
विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि 21वीं सदी में युद्ध की स्थिति में सभी सशस्त्र बलों को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है और इसी उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है।
सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी राठौड़ ने कहा कि सैन्य कर्मियों के तेज गति से एवं उच्च दबाव में काम करने और सटीकता से अभियान को पूरा करने के लिए आज के हालात में यह विधेयक जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हमेशा भारतीय सेना की जरूरतों को अहमियत दी है और रक्षा अवसंरचना को मजबूत किया है।
राठौड़ ने कहा कि इस विधेयक में प्रावधान है कि अगर युद्ध की स्थिति हो तो किसी अर्द्धसैनिक बल को भी इस विधेयक के तहत लाया जा सकता है।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रितेश पांडेय ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि देश में सेनाओं की केंद्रीय कमान के लिहाज से यह अत्यंत आवश्यक विधेयक है।
पांडेय ने कहा कि उन्हें इस विधेयक में एक खामी जरूर नजर आती है। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता के मामले में अब भी तीनों सेनाओं के अलग कानूनों के तहत भिन्न सजा दी जाएगी, जबकि इन सजाओं में एकरूपता जरूरी है।
वहीं, रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि रक्षा पर स्थायी समिति ने इस विधेयक को बिना किसी संशोधन के पारित करने की अनुशंसा की है।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद जुएल ओराम की अध्यक्षता वाली रक्षा संबंधी स्थायी समिति ने गत 21 जुलाई को लोकसभा में ‘अंतर सेना संगठन (कमान, नियंत्रण और अनुसंधान) विधेयक 2023’ पर अपनी रिपोर्ट पेश की।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ समिति प्रस्तावित कानून से पूरी तरह से सहमत है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने संज्ञान लिया कि वर्तमान में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मियों को उनके विशिष्ट सेना अधिनियम अर्थात सेना अधिनियम 1950, नौसेना अधिनियम 1957 और वायु सेना अधिनियम 1950 के उपबंधों के अनुसार शासित किया जाता है।
समिति ने इस ओर भी ध्यान दिया कि इस अधिनियम को लागू करने के समय अधिकांश सेना संगठनों में बड़े पैमाने पर थलसेना, नौसेना एवं वायु सेना के कर्मी शामिल थे। वर्तमान में अंडमान निकोबार कमान, सामरिक बल कमान, रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी जैसे कई अंतर सेना संगठन, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी तथा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय जैसे संयुक्त प्रशिक्षण संस्थान हैं, जहां सशस्त्र बलों और अन्य बलों के कर्मी एक साथ कार्य करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तथ्य के बावजूद कई अंतर सेना संगठन पूर्ण रूप से प्रचलन में है, फिर भी अंतर सेना संगठन के कमांडर इन चीफ या ऑफिसर इन कमांड को अब तक अन्य सेनाओं से संबंधित कार्मिकों के अनुशासनात्मक या प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।
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