ताजा खबरें | लोकसभा ने अंतर्देशीय जलयान विधेयक को मंजूरी दी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच अंतर्देशीय जलयान विधेयक, 2021 को बृहस्पतिवार को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें नदियों में जहाजों की सुरक्षा, पंजीकरण एवं सुगम परिचालन सुनिश्चित करने के प्रावधान किया गया है।

नयी दिल्ली, 29 जुलाई लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच अंतर्देशीय जलयान विधेयक, 2021 को बृहस्पतिवार को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें नदियों में जहाजों की सुरक्षा, पंजीकरण एवं सुगम परिचालन सुनिश्चित करने के प्रावधान किया गया है।

विधेयक को चर्चा एवं पारित होने के लिए रखते हुए पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि जहाजों की सुरक्षा, पंजीकरण एवं सुगम परिचालन के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में 1917 का कानून अपर्याप्त था और इससे कई तरह की बाधाएं उत्पन्न होती थी । ऐसे में यह विधेयक लाया गया ताकि पारिस्थितिकी अनुकूल वातावरण में जल यातायात को बढ़ावा मिल सके ।

आरएसपी के एम के प्रेमचंद्रन ने शोर शराबे के बीच विधेयक को पेश करने पर आपत्ति व्यक्त की ।

मंत्री के जवाब के निचले सदन में शोर शराबे के बीच ही अंतर्देशीय जलयान विधेयक, 2021 को मंजूरी दे दी।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने इस विधेयक को मंजूरी दी थी।

सरकार ने कहा था कि नदी में परिचालन करने वाले जहाजों का पंजीकरण एवं परिचालन संबंधी व्यवस्था अभी भारतीय जहाज अधिनियम के दायरे में आती है। यह कानून 1917 में बनाया गया था और काफी पुराना हो गया है।

सरकार ने कहा था कि उस समय सभी राज्यों के अपने-अपने नियमन थे। एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के लिए मंजूरी लेनी पड़ती थी और इससे समस्या पैदा होती थी। ऐसे में जहाजों की सुरक्षा, पंजीकरण एवं सुगम परिचालन के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है।

विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा बनाये गए नियम सम्पूर्ण देश में एक समान नहीं हैं। इसमें राज्य के अधिकार क्षेत्र से परे जलयान चलाने के लिये अनापत्ति प्रमाणपत्र या समर्थन की जरूरत तथा मानकों का एक समान नहीं होना एवं उपबंधों में लचीलेपन का अभाव जैसी खामियां थीं ।

इसमें कहा गया है, ‘‘ अत: एक शताब्दी पुराने अप्रचलित अंतर्देशीय जलयान अधिनियम के स्थान पर एक नया कानून बनाना जरूरी था।’’

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि इसका मकसद राज्यों के संबंध में उपबंधों में एकरूपता लाना है ताकि अंतर्देशीय जल के माध्यम से अर्थव्यवस्था, सुरक्षित परिवहन तथा व्यापार का संवर्द्धन किया जा सके ।

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